Starlink का भारत में लाइसेंस विवाद: एलन मस्क की नाराजगी पर उठे सवाल
स्टारलिंक का लाइसेंस विवाद
नई दिल्ली: भारत में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा की शुरुआत को लेकर स्टारलिंक के लाइसेंस का मामला चर्चा का विषय बना हुआ है। कंपनी के CEO एलन मस्क ने भारत में अनुमोदन में देरी पर अपनी नाराजगी व्यक्त की है और आरोप लगाया है कि कुछ प्रभावशाली उद्योगपति उनकी सेवाओं को रोकने का प्रयास कर रहे हैं। हालांकि, उन्होंने किसी विशेष व्यक्ति का नाम नहीं लिया। मस्क के इस बयान के बाद अब सवाल उठ रहा है कि जब चीन में भी स्टारलिंक पर प्रतिबंध है, तो वहां उनकी नाराजगी क्यों नहीं दिखाई देती।
राजीव मल्होत्रा का सवाल
राजीव मल्होत्रा ने क्या कहा?
भारतीय मूल के लेखक और शोधकर्ता राजीव मल्होत्रा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इस मुद्दे को उठाया है। उन्होंने लिखा कि एलन मस्क को यह स्पष्ट करना चाहिए कि चीन में स्टारलिंक को अनुमति क्यों नहीं मिली। क्या वहां भी कोई 'ओलिगार्क' है? उन्होंने यह भी कहा कि मस्क ने चीन में टेस्ला में बड़ा निवेश किया है, फिर भी वहां स्टारलिंक सेवाएं शुरू नहीं हो पाई हैं, लेकिन वे चीन के खिलाफ इस तरह की टिप्पणियां नहीं करते।
केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया
इस मामले पर क्या बोली केंद्र सरकार?
राजीव मल्होत्रा ने कहा कि स्टारलिंक का मुद्दा केवल तकनीकी या सेवा से संबंधित नहीं है, बल्कि यह देश की सुरक्षा और संप्रभुता से भी जुड़ा है। इसलिए सरकार हर पहलू की गहन जांच कर रही है। केंद्र सरकार ने पहले ही स्पष्ट किया है कि भारत में सभी कंपनियों के लिए नियम समान हैं और किसी के साथ भेदभाव नहीं किया जा रहा है।
सरकार के अनुसार, सैटेलाइट संचार क्षेत्र में तीन कंपनियों - एलन मस्क की स्टारलिंक, रिलायंस जियो सैटकॉम और भारती ग्रुप की यूटेलसैट वनवेब को प्रारंभिक मंजूरी दी गई है। इन सभी कंपनियों को सुरक्षा मानकों और आवश्यक प्रक्रियाओं को पूरा करने के बाद ही अंतिम अनुमोदन दिया जाएगा।