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गुजरात में सरकारी आदेशों का उल्लंघन सबसे अधिक, NCRB की रिपोर्ट में खुलासा

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया 2024' में गुजरात में सरकारी आदेशों के उल्लंघन के मामले सबसे अधिक सामने आए हैं। रिपोर्ट में बताया गया है कि सरकारी आदेशों का पालन न करने वाले लोगों में गुजराती और पंजाबी सबसे आगे हैं। अन्य राज्यों में भी उल्लंघन के मामले दर्ज हुए हैं। जानें किस राज्य में कितने मामले हैं और उल्लंघन पर क्या सजा हो सकती है।
 

NCRB की रिपोर्ट में उल्लंघन के आंकड़े

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) ने गृह मंत्रालय की रिपोर्ट 'क्राइम इन इंडिया 2024' में बताया है कि सरकारी आदेशों का सबसे ज्यादा उल्लंघन गुजरात में हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, सरकारी आदेशों का पालन न करने वाले लोगों में गुजराती और पंजाबी सबसे आगे हैं, जबकि पूर्वोत्तर राज्यों में ऐसे मामलों की संख्या बहुत कम है.


अन्य राज्यों में भी उल्लंघन के मामले

रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि पश्चिम बंगाल, हरियाणा, त्रिपुरा, केरल और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में भी सरकारी आदेशों का उल्लंघन हुआ है। हालांकि, प्रशासनिक आदेश आमतौर पर बाध्यकारी होते हैं, लेकिन इन राज्यों में लोगों ने इन्हें नजरअंदाज किया है.


राज्यवार आंकड़ों का विश्लेषण

भारत में सरकारी आदेशों की अवज्ञा से संबंधित दो धाराएं प्रचलित हैं। भारतीय दंड संहिता की धारा 188 और भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 223। रिपोर्ट में 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, कुल 40297 मामले सरकारी आदेशों के उल्लंघन के लिए दर्ज किए गए हैं। इनमें से 17209 मामले राज्यों में और 23088 मामले केंद्र शासित प्रदेशों में दर्ज हुए हैं.


कौन से राज्य में सबसे अधिक उल्लंघन?

गुजरात में 15925 मामले दर्ज किए गए हैं, जबकि पंजाब में 6926 और महाराष्ट्र में 3563 मामले सामने आए हैं। तेलंगाना में 2233, मध्य प्रदेश में 1227, हरियाणा में 684 और आंध्र प्रदेश में 550 मामले दर्ज हुए हैं. उत्तर प्रदेश में 467 और पश्चिम बंगाल में 492 मामले हैं, जबकि नागालैंड, ओडिशा, सिक्किम, त्रिपुरा और लक्षद्वीप में यह आंकड़ा शून्य है.


उल्लंघन पर संभावित सजा

IPC की धारा 188 के उल्लंघन पर सामान्य मामलों में एक महीने की जेल या जुर्माना हो सकता है। गंभीर मामलों में, जैसे कि मानव जीवन या स्वास्थ्य पर खतरा, 6 महीने तक की सजा हो सकती है। वहीं, BNS की धारा 223 के उल्लंघन पर सामान्य अपराधों में 6 महीने की सजा और 2500 रुपये का जुर्माना हो सकता है, जबकि गंभीर अपराधों में 1 साल की जेल और 5000 रुपये का जुर्माना हो सकता है.


सरकारी आदेशों की बाध्यता

सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता विशाल अरुण मिश्रा के अनुसार, भारतीय संविधान में संघ और राज्य की कार्यकारी शक्तियों का उल्लेख है। अनुच्छेद 73 संघ की कार्यकारी शक्ति और अनुच्छेद 162 राज्य की कार्यकारी शक्ति से संबंधित हैं। इन अनुच्छेदों के कारण कार्यकारी शक्ति का विस्तार उन विषयों तक होता है जिन पर संसद या राज्य विधायिका को कानून बनाने का अधिकार है.


प्रशासनिक आदेशों का महत्व

विशाल अरुण मिश्रा ने बताया कि लोक सेवक विभिन्न वैधानिक कानूनों के माध्यम से प्रशासनिक आदेश जारी कर सकते हैं। ये आदेश संविधान के अनुच्छेद 166 या अनुच्छेद 77 के तहत 'राष्ट्रपति या राज्यपाल के नाम' से जारी होते हैं.