जल जीवन मिशन: 7 साल में 82% ग्रामीण घरों तक पहुंचा साफ पानी
जल जीवन मिशन का सफर
देश की स्वतंत्रता के 80वें वर्ष के जश्न से पहले, जल जीवन मिशन ने अपने 7 साल पूरे कर लिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त 2019 को इस मिशन की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य हर ग्रामीण परिवार को नियमित और सुरक्षित पीने का पानी उपलब्ध कराना है। जब यह मिशन शुरू हुआ, तब केवल 3.23 करोड़ ग्रामीण परिवारों में नल का पानी था, जो कुल ग्रामीण घरों का 16.72 प्रतिशत था। अब यह आंकड़ा बढ़कर 15.91 करोड़ से अधिक हो गया है, जो कुल ग्रामीण घरों का 82.24 प्रतिशत है।
नल कनेक्शन की बढ़ती संख्या
इन 7 वर्षों में 12.68 करोड़ नए नल कनेक्शन जोड़े गए हैं। एक महत्वपूर्ण उपलब्धि यह है कि 188 जिले, 1,090 ब्लॉक, 1.01 लाख ग्राम पंचायतें और 2.04 लाख गांव अब 'हर घर जल' प्रमाणित हो चुके हैं। देश के 9.34 लाख स्कूलों में पानी की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जो लगभग 90.86 प्रतिशत है। इसके अलावा, 9.73 लाख आंगनवाड़ी केंद्रों में भी पीने योग्य पानी के नल लगाए गए हैं, जो करीब 86.21 प्रतिशत है।
हर चौथे जिले में पहुंचा शुद्ध पानी
15 अगस्त 2026 तक, 'हर घर जल' का रियल टाइम डेटा दर्शाता है कि देश के 754 जिलों में से लगभग हर चौथा जिला 'हर घर जल' घोषित हो चुका है, जो करीब 25.9 प्रतिशत है। हालांकि, पूरी तरह प्रमाणित जिलों की संख्या घटकर 15.8 प्रतिशत रह गई है, यानी 195 में से केवल 119 जिले पूरी तरह से 'हर घर जल' प्रमाणित हैं।
ब्लॉक और पंचायत स्तर की स्थिति
ब्लॉक स्तर पर भी स्थिति कुछ ऐसी ही है। देश के 7,144 ब्लॉकों में से 27.4 प्रतिशत ब्लॉक रिपोर्ट किए गए हैं, जबकि सर्टिफाइड ब्लॉकों की संख्या केवल 15.3 प्रतिशत है। रिपोर्टेड आंकड़ा 1,958 है, जबकि सर्टिफाइड आंकड़ा 1,094 है। पंचायत स्तर पर, 2 लाख 61 हजार से अधिक पंचायतों में से 51.1 प्रतिशत रिपोर्टेड हैं, और 38.5 प्रतिशत पंचायतें पूरी तरह सर्टिफाइड हो चुकी हैं।
गांवों की स्थिति
देश के 5 लाख 86 हजार से अधिक गांवों में से लगभग आधे यानी 49.5 प्रतिशत गांव रिपोर्टेड हैं, जबकि 35 प्रतिशत गांव सर्टिफाइड हो चुके हैं। रिपोर्टेड गांवों की संख्या 2,89,916 है, जबकि सर्टिफाइड गांवों की संख्या 2,05,028 है।
सफल राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की सूची
अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, अरुणाचल प्रदेश, दादरा-नगर हवेली एवं दमन-दीव, गोवा, हरियाणा, पुदुचेरी और पंजाब, ये सात राज्य और केंद्र शासित प्रदेश शत-प्रतिशत उपलब्धि हासिल कर चुके हैं। इनके सभी जिले न केवल रिपोर्टेड हैं बल्कि पूरी तरह सर्टिफाइड भी हो चुके हैं।
राज्यवार आंकड़े
गुजरात में 97 प्रतिशत जिले रिपोर्टेड हैं, लेकिन सर्टिफिकेशन केवल 30 प्रतिशत तक पहुंचा है। हिमाचल प्रदेश में सभी जिले रिपोर्टेड हैं, लेकिन केवल 33 प्रतिशत जिले सर्टिफाइड हो सके हैं। तमिलनाडु में यह आंकड़ा क्रमशः 49 और 38 प्रतिशत है। तेलंगाना में सभी जिले रिपोर्टेड हैं, लेकिन जिला स्तर पर कोई सर्टिफाइड नहीं है।
बड़े राज्यों की स्थिति
रिपोर्ट में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि असम, छत्तीसगढ़, झारखंड, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, ओडिशा, राजस्थान, सिक्किम, त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पश्चिम बंगाल जैसे 15 राज्यों में जिला स्तर पर सर्टिफिकेशन का आंकड़ा अब भी शून्य प्रतिशत पर है।
गांवों की स्थिति
उत्तर प्रदेश में लगभग 39 प्रतिशत गांव रिपोर्टेड हैं, लेकिन सर्टिफाइड केवल 29 प्रतिशत हैं। मध्य प्रदेश में 53 प्रतिशत गांव रिपोर्टेड और 38 प्रतिशत सर्टिफाइड हैं। महाराष्ट्र में यह आंकड़ा 51 और 37 प्रतिशत है, जबकि राजस्थान में केवल 32 प्रतिशत गांव रिपोर्टेड और मात्र 15 प्रतिशत सर्टिफाइड हो सके हैं।
सरकार की नई योजना
सरकार ने इस मिशन को दिसंबर 2028 तक बढ़ा दिया है। अब ध्यान केवल पाइपलाइन बिछाने पर नहीं, बल्कि पानी के स्रोतों को टिकाऊ बनाने, समुदाय की भागीदारी बढ़ाने और लंबे समय तक सिस्टम को सही तरीके से चलाने पर है। बारिश के पानी को संचित करने, भूजल रिचार्ज और गांव स्तर पर पानी की सुरक्षा पर भी जोर दिया जा रहा है।
सर्टिफिकेशन में चुनौतियां
सिद्धार्थनगर जिले के पंचायत मित्र संजय कुमार ने बताया कि 'हर घर जल योजना में रिपोर्टेड और सर्टिफाइड का फर्क इसलिए है क्योंकि कोई गांव भले ही काम पूरा बता दे, लेकिन सर्टिफाइड तभी माना जाता है जब ग्राम सभा की बैठक में लोग खुद प्रस्ताव पास करें कि हर घर में नल से सुरक्षित पानी पहुंच रहा है।' एक ब्लॉक अधिकारी ने नाम न बताने की शर्त पर कहा कि इस प्रक्रिया में फील्ड इंजीनियर की जानकारी के बाद ही बैठक होती है, जो समय लेती है।