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निर्मला सीतारमण ने कम्युनिस्टों को 'कायर' कहा, जॉन ब्रिटास पर कसा तंज

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कम्युनिस्टों को 'कायर' करार देते हुए जॉन ब्रिटास की आलोचना की। उन्होंने कहा कि ब्रिटास ने UPI टैक्स पर भ्रम फैलाया है। सदन में चर्चा के दौरान, सीतारमण ने ब्रिटास के आरोपों का जवाब देने का प्रयास किया, लेकिन वह बिना जवाब सुने सदन से बाहर चले गए। जानें इस विवाद की पूरी कहानी और सीतारमण की कड़ी प्रतिक्रिया।
 

वित्त मंत्री का बयान

भारत की वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को कम्युनिस्टों को 'कायर' करार दिया। उन्होंने कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) के सांसद जॉन ब्रिटास की आलोचना करते हुए कहा कि उन्होंने UPI टैक्स ट्रांजेक्शन पर लगाए जा रहे कथित कर के खिलाफ देश में भ्रम फैलाया। यह टिप्पणी उन्होंने राज्य सभा में 'द टैक्सेशन एंड अदर लॉ (अमेंडमेंट) बिल, 2026' पर चर्चा के दौरान की।


जॉन ब्रिटास का आरोप

जॉन ब्रिटास ने आरोप लगाया कि सरकार ने अमेरिका के दबाव में UPI लेनदेन पर कर लगाने का निर्णय लिया है, जैसा कि ब्राजील के मामले में हुआ था। उन्होंने यह भी कहा कि यह कदम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दावे के खिलाफ है जिसमें उन्होंने कहा था कि भारत का डिजिटल भुगतान इको सिस्टम मुफ्त है।


सदन से बाहर जाने का विवाद

उपसभापति हरिवंश ने हंगामे के बीच CPI(M) सदस्य को अपना प्रस्ताव पेश करने की अनुमति दी थी। जब समय सीमा समाप्त होने के कारण उनका भाषण रोक दिया गया, तो वह सदन से बाहर चले गए।


निर्मला सीतारमण की कड़ी प्रतिक्रिया

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'जॉन ब्रिटास अगर एक लाइन सुनना चाहें तो यहां रह सकते हैं। ठेठ कम्युनिस्ट तरीका, 'तथ्यों के बिना' हर किसी पर हमला करना, तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर पेश करना और साथ ही अपने अधिकार की मांग करना कि 'मुझे बोलना ही है'। जब उन्हें एक-एक बिंदु पर जवाब दिए जाने हैं, तो उनमें साहस नहीं होता। कायर।'


निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री:-
इस देश में कम्युनिस्ट कायर हैं। सदस्य (जॉन ब्रिटास) ने यह साबित कर दिया है। वे तथ्यों का सामना नहीं कर सकते, बल्कि वे केवल बाधा डालते रहेंगे और शोर मचाते रहेंगे।


सुनने का अधिकार

निर्मला सीतारमण ने कहा, 'क्या उनके पास सुनने का अधिकार नहीं है? जब जवाब दिया जाता है तो मेरा भी यह कहने का मन करता है कि जवाब देना मेरा अधिकार है।' उन्होंने यह भी कहा कि वह सभी सदस्यों की बात सुनती हैं और चर्चा में शामिल सभी सदस्यों को जवाब देने का प्रयास करती हैं।


निर्मला सीतारमण, केंद्रीय वित्त मंत्री:-
माननीय जॉन ब्रिटास को जवाब सुनने के लिए यहां रुकना चाहिए था क्योंकि वह न केवल यहां बल्कि पूरे देश में भ्रम फैला रहे हैं, क्योंकि यही वह रणनीति है जिसे कम्युनिस्ट अपनाते हैं। पूरी तरह से असत्य।


जॉन ब्रिटास का प्रस्ताव

जॉन ब्रिटास, सांसद, CPI (M):-
अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधियों की तरफ से इस बात पर जोर दिया गया है कि आपको यूपीआई पर शुल्क वसूलने की जरूरत है। ब्राजील पर भी यही दबाव डाला गया था। अब सरकार की नीति को पूरी तरह से उलट दिया गया है और उन्होंने इस कानून में चतुराई से यूपीआई के घटक को शामिल कर लिया है।


जॉन ब्रिटास ने पहले अपना प्रस्ताव पेश करते हुए कहा कि देश में विदेशी पूंजी आने की उम्मीद में अध्यादेश जारी किया गया और बाद में यह विधेयक लाया गया। इस पर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने ऐतराज जताया।