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पंजाब की नहरों में लाशों की खोज: आशू मलिक की कहानी

पंजाब की नहरों में लाशों की खोज करने वाले आशू मलिक की कहानी बेहद खौफनाक है। उन्होंने 32 वर्षों में हजारों लाशें निकाली हैं और इस दौरान उन्हें कई डरावने अनुभवों का सामना करना पड़ा। उनकी डॉक्यूमेंट्री 'Dead Body Finder' में नहरों से लाशें निकालने की प्रक्रिया और पुलिस प्रशासन की लापरवाही को उजागर किया गया है। जानें कैसे ये लाशें पंजाब से राजस्थान तक पहुंचती हैं और आशू का अनुभव क्या है।
 

नहरों में लाशों का खौफनाक सच

पंजाब की नहरें केवल खेतों को पानी नहीं देतीं, बल्कि ये लाशों को ठिकाने लगाने का एक साधन भी बन चुकी हैं। हाल ही में एक डॉक्यूमेंट्री 'Dead Body Finder' में दिखाया गया है कि कैसे आशू मलिक, जो एक गोताखोर हैं, ने दिल्ली से लेकर पंजाब, हरियाणा और राजस्थान तक की नहरों से हजारों लाशें निकाली हैं। आशू मलिक पानीपत, हरियाणा के निवासी हैं और पिछले 32 वर्षों से गोताखोरी का काम कर रहे हैं। इस डॉक्यूमेंट्री में उन्होंने अपने खतरनाक काम के बारे में बताया है।


आशू मलिक का अनुभव

आशू मलिक अब तक नहरों से 10,000 लाशें निकाल चुके हैं। उन्होंने कहा, 'भाखड़ा नहर में पानी का प्रवाह बहुत तेज होता है, जिससे लाश निकालना कठिन हो जाता है। लगभग 5 दिन बाद लाशें पानी पर तैरने लगती हैं और तब उन्हें निकाला जाता है।' उन्होंने एक लाश को करीब ढाई साल बाद निकाला।


लाशों का सामना करना

लाशों को देखकर अधिकांश लोग डर जाते हैं। आशू से जब पूछा गया कि क्या उन्हें लाशें निकालने के बाद डरावने सपने आते हैं, तो उन्होंने कहा कि उन्हें हर रोज ऐसे सपने आते हैं। उन्होंने बताया, 'कई बार ऐसा लगता है कि कोई मुझे मार रहा है या मेरे घर में आत्माएं हैं जिनकी लाश मैंने निकाली।'


पुलिस प्रशासन की लापरवाही

आशू ने बताया कि उन्हें रोजाना विभिन्न प्रकार के मामले देखने को मिलते हैं, जिनमें कई लावारिश लाशें भी शामिल हैं। उन्होंने एक मामले का जिक्र किया जिसमें एक 10 साल की बच्ची की लाश मिली, जिसे रेप के बाद नहर में फेंका गया था। उन्होंने पुलिस की लापरवाही को भी उजागर किया, जिसमें एक वीडियो में एक कुत्ता नहर के किनारे एक लाश को खा रहा था जबकि पुलिस अधिकारी वहां खड़े थे।


राजस्थान तक लाशों का सफर

आशू ने बताया कि कई बार लाशें पंजाब से राजस्थान तक चली जाती हैं। वहां के स्थानीय लोग इन लाशों को निकालकर जला देते हैं। इस तरह कई लोगों की कहानियाँ खत्म हो जाती हैं, जो न तो रिकॉर्ड में आती हैं और न ही उनके परिजनों को कभी उनकी लाश मिलती है।


डॉक्यूमेंट्री देखें