पूर्व नौकरशाहों का चुनाव आयोग के खिलाफ महाभियोग का नोटिस
पूर्व नौकरशाहों का विरोध
भारत के पूर्व सिविल सर्वेंट्स ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के खिलाफ आवाज उठाई है। सोमवार को, ये अधिकारी चुनाव आयोग जाकर CEC को महाभियोग का 'जन-नोटिस' सौंपने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोक दिया। सुरक्षा कारणों से भारी पुलिस बल तैनात किया गया था, जिससे वे आयोग नहीं जा सके।
प्रेस कांफ्रेंस में उठी आवाज
चुनाव आयोग में जाने की अनुमति न मिलने पर, पूर्व नौकरशाहों ने दिल्ली के प्रेस क्लब में एक प्रेस कांफ्रेंस आयोजित की। सभी ने एक स्वर में ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की और कहा कि वह भारत के लोकतंत्र को कमजोर कर रहे हैं।
प्रतिनिधिमंडल की मांग
इस प्रतिनिधिमंडल में कई प्रमुख पूर्व अधिकारी शामिल थे, जैसे कि पूर्व IAS नजीब जंग, पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई, और अन्य। ये सभी ज्ञानेश कुमार से मुलाकात की इच्छा व्यक्त कर रहे थे।
संविधान का उल्लंघन
नजीब जंग ने कहा कि उन्हें दुख है कि संविधान, जिसे वे अपने जीवन का मार्गदर्शक मानते हैं, को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने ज्ञानेश कुमार पर आरोप लगाया कि वह संविधान का उल्लंघन कर रहे हैं।
SIR प्रक्रिया पर सवाल
जंग ने कहा कि SIR प्रक्रिया में नीयत साफ नहीं है, जिसके कारण 13 करोड़ लोग वोटिंग से वंचित हो गए हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति अस्वीकार्य है।
विरोध की आवाजें
पूर्व IPS अधिकारी यशोवर्धन आजाद ने कहा कि चुनाव आयुक्त से मिलने की कोशिश में उन्हें भारी बैरिकेडिंग का सामना करना पड़ा। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बड़ी संख्या में जवान तैनात किए थे।
नागरिकता का मुद्दा
पूर्व गृह सचिव जी.के. पिल्लई ने कहा कि चुनाव आयोग ने नागरिकता के मुद्दे पर एक नया बदलाव किया है, जिसमें नागरिकों से यह साबित करने को कहा जा रहा है कि वे भारतीय हैं। उन्होंने इसे संविधान के खिलाफ बताया।