बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पर नाबालिग पीड़िता की पहचान उजागर करने का आरोप
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी विवादों में
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक गंभीर विवाद में फंस गए हैं। उन पर आरोप है कि उन्होंने जमुई जिले में यौन उत्पीड़न का शिकार हुई एक नाबालिग लड़की की पहचान सार्वजनिक कर दी। इस मुद्दे पर विपक्षी दल राष्ट्रीय जनता दल (RJD) और कांग्रेस ने मुख्यमंत्री की कड़ी आलोचना की है, और उनकी शिक्षा तथा कानूनी ज्ञान पर सवाल उठाए हैं.
मुख्यमंत्री से मुलाकात
पीड़ित नाबालिग अपने परिवार के साथ 24 सितंबर को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मिलने गई थी। अधिकारियों के अनुसार, इस मुलाकात के दौरान मुख्यमंत्री ने परिवार को आश्वासन दिया कि दोषियों को एक महीने के भीतर फास्ट ट्रैक ट्रायल के माध्यम से सजा दिलाई जाएगी.
सोशल मीडिया पर विवाद
मुलाकात के बाद, सम्राट चौधरी ने अपने X अकाउंट पर पीड़िता और उसके परिवार के साथ एक तस्वीर साझा की। विवाद बढ़ने पर यह पोस्ट हटा दी गई, लेकिन RJD के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष तेजस्वी यादव ने इसका स्क्रीनशॉट ले लिया। उन्होंने इस स्क्रीनशॉट को X पर साझा करते हुए मुख्यमंत्री को 'मूर्ख और नाकाबिल' कहा.
पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन
तेजस्वी यादव ने आरोप लगाया कि सम्राट चौधरी ने पॉक्सो एक्ट का उल्लंघन किया है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री पहले से ही कई गंभीर मामलों में दोषी करार दिए जा चुके हैं और उन्हें सख्त सजा मिलनी चाहिए.
जमुई में घटना का विवरण
19 सितंबर को, जमुई में एक किशोर और किशोरी को कुछ लोगों ने रोक लिया था। इन लोगों ने दोनों के साथ मारपीट और छेड़छाड़ की, जिसके बाद उन्हें जाने दिया गया. पीड़िता का वीडियो कई पत्रकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं द्वारा साझा किया गया.
मीसा भारती की FIR की मांग
तेजस्वी यादव की बहन और RJD सांसद मीसा भारती ने भी इस मामले में मुख्यमंत्री के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की। उन्होंने आरोप लगाया कि जहां बिहार पुलिस छेड़छाड़ के वीडियो अपलोड करने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, वहीं मुख्यमंत्री ने खुद पीड़िता की पहचान उजागर कर दी.
यौन पीड़िता की पहचान उजागर करना
विशाल अरुण मिश्र, सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट ऑन रिकॉर्ड, ने कहा कि भारतीय न्याय संहिता की धारा 72 के तहत यौन उत्पीड़न की पीड़िता की पहचान उजागर करना एक दंडनीय अपराध है. इसके तहत पीड़िता का नाम, फोटो या कोई भी जानकारी सार्वजनिक करना प्रतिबंधित है.
नाबालिग पीड़िता के मामले में गंभीरता
विशाल अरुण मिश्र ने बताया कि यदि पीड़िता नाबालिग है, तो मामला पॉक्सो एक्ट के अंतर्गत आता है. इस एक्ट के तहत नाबालिग पीड़ित बच्चे की पहचान उजागर करना गंभीर अपराध है, जिसके लिए सजा का प्रावधान है.
क्यों है यह अपराध?
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय के शोधकर्ता निखिल गुप्ता ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत हर व्यक्ति को गरिमा और निजता का अधिकार है. पीड़िता की पहचान उजागर होने से उसकी निजता का उल्लंघन होता है.
अदालतों का रुख
एडवोकेट अनुराग ने बताया कि भारतीय अदालतें यौन पीड़िता की पहचान उजागर करने पर सख्त रुख अपनाती हैं. कई मामलों में अदालतों ने इस पर अपनी नाराजगी जाहिर की है.