☰
×

भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन: कर्मचारियों की कमी और सुरक्षा पर चिंता

भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग का चलन तेजी से बढ़ रहा है, जिससे कर्मचारियों की संख्या में कमी और सुरक्षा चिंताएं उत्पन्न हो रही हैं। यूनियनों का विरोध और रिक्त पदों की भरपाई न होने के कारण युवा भी चिंतित हैं। उत्तर रेलवे मेंस यूनियन के अध्यक्ष एस. के. त्यागी ने इस मुद्दे पर गंभीर चिंता जताई है। रेलवे में काम का बोझ बढ़ रहा है, लेकिन स्थायी भर्ती नहीं हो रही है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
 

भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन

भारतीय रेलवे में आउटसोर्सिंग के माध्यम से काम करने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ रही है। इसका मतलब है कि रेलवे ठेके पर कर्मचारियों को नियुक्त कर रहा है, जबकि पहले यह सरकारी भर्ती के जरिए लोगों को नौकरी पर रखता था। वर्तमान में, आउटसोर्सिंग के तहत काम करने वाले कर्मचारियों में IRCTC से लेकर रेलवे की सुरक्षा से जुड़े लोग शामिल हैं। यह सब तब हो रहा है जब रेलवे के विभिन्न विभागों में लाखों पद खाली पड़े हैं।


यूनियनों की नाराजगी

भारतीय रेलवे द्वारा आउटसोर्सिंग के बढ़ते चलन के कारण यूनियनों में भारी असंतोष है। रेलवे के रिक्त पदों को न भरने के कारण सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवा भी चिंतित हैं। ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) और उत्तर रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) ने इस मुद्दे पर खुलकर विरोध किया है, लेकिन सरकार का ध्यान इस ओर नहीं जा रहा है।


उत्तर रेलवे मेंस यूनियन के अध्यक्ष का बयान

उत्तर रेलवे मेंस यूनियन के अध्यक्ष एस. के. त्यागी ने आउटसोर्सिंग के प्रभावों पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि रेलवे ट्रैक की लंबाई बढ़ रही है, नई लाइनें बिछाई जा रही हैं, और ट्रेनें भी बढ़ रही हैं, लेकिन इसके अनुपात में स्थायी भर्ती नहीं हो रही है।


रेलवे पर बढ़ता लोड

त्यागी ने बताया कि पहले रेलवे में लगभग 16 लाख कर्मचारी थे, जबकि अब यह संख्या घटकर 12-12.5 लाख रह गई है। रेलवे ट्रैक की लंबाई 71 हजार किलोमीटर से अधिक हो गई है, और रोजाना 13 हजार पेयर ट्रेनें चल रही हैं।


आउटसोर्सिंग का खतरा

त्यागी ने कहा कि रेलवे में आउटसोर्सिंग के कारण कर्मचारियों की संख्या में कमी आ रही है, जबकि काम का बोझ बढ़ रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि रेलवे ने पहले गैर-मुख्य गतिविधियों में आउटसोर्सिंग शुरू की थी, जैसे कि कैटरिंग और साफ-सफाई।


भर्ती की कमी

त्यागी ने बताया कि रेलवे में लगभग 2.5 लाख पद खाली हैं, लेकिन सरकार इन्हें नहीं भर रही है। हर साल नई भर्तियां की जा रही हैं, लेकिन केवल उतने ही लोग भर्ती किए जा रहे हैं जितने रिटायर हो रहे हैं।


आउटसोर्सिंग के खिलाफ आवाज

त्यागी ने चेतावनी दी कि रेलवे में आउटसोर्सिंग का बढ़ता चलन खतरनाक है। उन्होंने कहा कि रेलवे में 50% काम आउटसोर्सिंग कर्मचारियों द्वारा किया जा रहा है, जो सुरक्षा के लिए गंभीर चिंता का विषय है।


सरकारी भर्ती की मांग

उन्होंने मांग की कि रेलवे में स्थायी सरकारी कर्मचारियों को प्राथमिकता दी जाए और आउटसोर्सिंग की बजाय उन लोगों को भर्ती किया जाए जिन्होंने रेलवे में अप्रेंटिसशिप की है।