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सरकार ने चीनी की कीमतों पर नियंत्रण के लिए उठाए कदम

देश में चीनी की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिसके चलते सरकार ने थोक खरीदारों के लिए स्टॉक सीमाएं निर्धारित की हैं। इस कदम का उद्देश्य कीमतों को नियंत्रित करना और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करना है। इसके अलावा, कच्ची चीनी के आयात को भी सरल बनाया गया है। जानें इस निर्णय के पीछे के कारण और विपक्ष की प्रतिक्रिया।
 

चीनी की कीमतों में वृद्धि पर सरकार की प्रतिक्रिया

देश के विभिन्न हिस्सों में चीनी की कीमतों में तेजी से वृद्धि हो रही है। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए, सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। केंद्र सरकार ने हाल ही में थोक खरीदारों के लिए चीनी भंडारण की सीमा निर्धारित की है। इसके साथ ही, कच्ची चीनी के आयात को भी सरल बनाया गया है। त्योहारों का मौसम नजदीक आने के कारण चीनी की कीमतों में यह उछाल देखा जा रहा है.


थोक उपभोक्ताओं के लिए नई भंडारण सीमाएं

सरकार के निर्देशों के अनुसार, वे थोक उपभोक्ता जो हर महीने औसतन 10 मीट्रिक टन या उससे अधिक चीनी का उपयोग करते हैं, उन्हें अपनी आवश्यकताओं से अधिक स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इस आदेश में मिठाई बनाने वाले हलवाई, सॉफ्ट ड्रिंक निर्माता, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, मिठाई विक्रेता और अन्य बड़े खरीदार शामिल हैं.


स्टॉक रखने की अवधि

इन खरीदारों को 15 दिनों से अधिक समय तक चीनी का स्टॉक रखने की अनुमति नहीं होगी। इसका मतलब है कि उन्हें केवल 15 दिनों की आवश्यक चीनी ही अपने पास रखनी होगी। हालांकि, सरकारी संस्थानों पर यह नियम लागू नहीं होगा.


सरकार की निगरानी प्रक्रिया

सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि मिलों से थोक खरीदारों को कितनी चीनी बेची जा रही है। इसके लिए गुड्स एंड सर्विस टैक्स (GST) रिटर्न और चीनी से संबंधित एचएसएन कोड का उपयोग किया जाएगा, जिससे यह स्पष्ट होगा कि कौन कितनी चीनी खरीदता और उपयोग करता है.


कच्ची चीनी के आयात पर निर्णय

वाणिज्य मंत्रालय ने एक और महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। अक्टूबर 2026 के अंत तक 10 लाख मीट्रिक टन कच्ची चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने की अनुमति दी गई है। यह आयात टैरिफ रेट कोटा के तहत किया जाएगा, जिससे देश में चीनी की आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद है.


चीनी की कीमतों में वृद्धि

पिछले एक महीने में चीनी की कीमतों में लगभग 15 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। उपभोक्ता मामले विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 20 अगस्त को खुदरा कीमत 5,152 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई, जबकि एक महीने पहले यह 4,476 रुपये प्रति क्विंटल थी.


सरकार का स्टॉक लिमिट निर्णय

सरकार का यह निर्णय कीमतों को नियंत्रित करने और बाजार में पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए लिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि स्टॉक की सीमा लगाने से जमाखोरी को रोका जा सकेगा और आयात से अतिरिक्त चीनी उपलब्ध होगी.


विपक्ष की प्रतिक्रिया

विपक्षी नेताओं ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए E20 एथेनॉल ब्लेंडिंग को जिम्मेदार ठहराया है। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गन्ने से एथेनॉल बनाने के कारण चीनी की कमी हो गई है, जिससे कीमतें 46 रुपये से 65 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गई हैं. कांग्रेस और समाजवादी पार्टी ने भी सरकार को इस मुद्दे पर घेरा है.