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सुप्रीम कोर्ट ने कैंसर दवाओं की पहुंच पर लिया संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया है, जो एक केरल की महिला द्वारा दायर याचिका से संबंधित है। महिला, जो स्तन कैंसर से पीड़ित थी, ने दवाओं की उच्च कीमतों को चुनौती दी थी, लेकिन याचिका लंबित रहने के दौरान उनका निधन हो गया। कोर्ट ने मामले की सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश दिया है। जानें इस महत्वपूर्ण मामले के बारे में और क्या कहा गया है।
 

सुप्रीम कोर्ट का स्वत: संज्ञान

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जीवनरक्षक दवाओं की उपलब्धता के मुद्दे पर स्वत: संज्ञान लिया। यह मामला केरल हाई कोर्ट में 'पेटेंट कैंसर दवाओं' की पहुंच से संबंधित एक याचिका से जुड़ा है। शीर्ष अदालत ने जीवनरक्षक दवाओं की पहुंच और जीवन के अधिकार से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने पर चर्चा की।


महिला का दुखद मामला

यह मामला एक केरल की महिला से संबंधित है, जो स्तन कैंसर से ग्रसित थी। उन्होंने उपचार में उपयोग होने वाली दवाओं की अत्यधिक कीमत को चुनौती देते हुए केरल हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। हालांकि, याचिका लंबित रहने के दौरान महिला का निधन हो गया।


कैंसर-रोधी दवाओं की उपलब्धता

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए कहा कि केरल हाई कोर्ट में पेटेंट कैंसर-रोधी दवाओं की वहनीयता से संबंधित मामला लंबित है।


सुनवाई में तेजी लाने का निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोटिस जारी करते हुए केरल हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस से कहा कि वे मामले का शीघ्र निस्तारण सुनिश्चित करें। सुनवाई के दौरान बताया गया कि याचिका दायर करने वाली महिला का निधन हो चुका है।


महिला ने 2022 में एर्नाकुलम से यह याचिका दायर की थी। उनकी मृत्यु के बाद, केरल हाई कोर्ट ने जनहित को ध्यान में रखते हुए कार्यवाही को स्वत: जारी रखने का निर्णय लिया और मामले का शीर्षक बदलकर 'जीवनरक्षक पेटेंट दवाइयों की अत्यधिक कीमतों के मामले में' कर दिया।