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सुप्रीम कोर्ट ने सुल्तानपुर विधानसभा सीट पर आरक्षण चुनौती को खारिज किया

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट पर स्थायी आरक्षण को चुनौती देने वाली याचिका को खारिज कर दिया। याचिकाकर्ता जगदीश सिंह ने आरोप लगाया कि यह आरक्षण केवल कुछ परिवारों को लाभ पहुंचाता है। अदालत ने कहा कि यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है और अदालतें इस पर निर्देश नहीं दे सकतीं। जानें इस मामले में अदालत ने क्या कहा और याचिकाकर्ता के तर्कों का क्या हुआ।
 

आरक्षण पर याचिका का निपटारा

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की 191-कादीपुर विधानसभा सीट, जो 1952 से अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है, पर एक याचिका दायर की गई थी। याचिकाकर्ता जगदीश सिंह ने सुप्रीम कोर्ट में स्थायी आरक्षण को चुनौती दी, यह आरोप लगाते हुए कि इससे केवल कुछ परिवारों को लाभ हुआ है।


सुप्रीम कोर्ट का निर्णय

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह मामला संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है और अदालतें इस पर निर्देश नहीं दे सकतीं। याचिकाकर्ता ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले को चुनौती दी थी, जिसमें रोटेशनल रिजर्वेशन की मांग को अस्वीकार किया गया था।


संविधान के अनुच्छेदों का हवाला

जगदीश सिंह ने तर्क दिया कि स्थायी आरक्षण संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 का उल्लंघन करता है, क्योंकि यह मतदाताओं को केवल एससी उम्मीदवारों को चुनने के लिए मजबूर करता है। उन्होंने पंचायतों और नगर पालिकाओं में लागू रोटेशनल सिस्टम की तरह विधानसभा में भी ऐसा ही व्यवस्था की मांग की।


जस्टिस बागची का बयान

जस्टिस बागची ने कहा कि लोकतंत्र में विभिन्न राजनीतिक विचारधाराएं होती हैं और मतदाता को पार्टी को वोट देना चाहिए, न कि धर्म को। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि संविधान में स्थानीय निकाय चुनावों के लिए अलग नियम हैं और अदालत इन नियमों को नहीं बदल सकती।


मुख्य न्यायाधीश का हल्का अंदाज

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने याचिकाकर्ता से मजाक करते हुए कहा कि वह गलत नंबर डायल कर रहे हैं और रोटेशन की मांग संसद में उठाई जानी चाहिए। उन्होंने इस याचिका को खारिज करते हुए कहा कि यह प्रोटेस्ट का एक अच्छा आधार है।