TMC का निर्वाचन आयोग के खिलाफ विरोध, राज्यसभा से किया बहिर्गमन
राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस का विरोध
नई दिल्ली। सोमवार को राज्यसभा में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के सदस्यों ने निर्वाचन आयोग द्वारा पश्चिम बंगाल के उच्च अधिकारियों को हटाने के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए सदन से बहिर्गमन किया। शून्यकाल के दौरान, तृणमूल कांग्रेस के डेरेक ओ ब्रायन ने इस मुद्दे को उठाया और बताया कि निर्वाचन आयोग ने रात के समय पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव, प्रधान सचिव और गृह सचिव को उनके पदों से हटा दिया है।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी इस कदम का विरोध करती है और इसलिए वे सदन से बहिर्गमन कर रहे हैं। इस पर, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रीजीजू ने तृणमूल कांग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है और इसके निर्णयों से सरकार का कोई संबंध नहीं है। उन्होंने कहा कि संविधान में आयोग को अधिकार दिए गए हैं और इस मुद्दे को सदन में उठाना समय का दुरुपयोग है।
मुख्य सचिव का तबादला
उन्होंने यह भी कहा कि संवैधानिक संस्थाओं का सम्मान होना चाहिए, लेकिन तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस पार्टी अक्सर इन संस्थाओं पर हमला करती हैं। उल्लेखनीय है कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की घोषणा के कुछ घंटे बाद निर्वाचन आयोग ने ममता बनर्जी सरकार के दो शीर्ष अधिकारियों को उनके पदों से हटा दिया, जिनमें मुख्य सचिव नंदिनी चक्रवर्ती शामिल हैं।
आयोग ने 1993 बैच के IAS अधिकारी दुष्यंत नरियाला को राज्य का नया मुख्य सचिव नियुक्त किया और कहा कि नंदिनी चक्रवर्ती को चुनाव संबंधी कार्यों से हटा दिया जाएगा। इसके अलावा, गृह सचिव जगदीश प्रसाद मीना को भी उनके पद से हटा दिया गया। आयोग ने 1997 बैच की IAS अधिकारी संघमित्रा घोष को गृह एवं पर्वतीय मामलों की प्रधान सचिव नियुक्त करने का निर्देश दिया।
आयोग के सचिव सुजीत कुमार मिश्रा द्वारा हस्ताक्षरित पत्र के अनुसार, जिन अधिकारियों का तबादला किया गया है, उन्हें चुनाव संपन्न होने तक किसी भी चुनाव संबंधी पद पर तैनात नहीं किया जाएगा। आयोग ने कहा कि यह निर्णय राज्य में चुनाव की तैयारियों की समीक्षा के बाद लिया गया है। निर्देशों को तुरंत लागू करने का आदेश दिया गया है और अधिकारियों की नियुक्ति के संबंध में अनुपालन रिपोर्ट सोमवार अपराह्न तीन बजे तक भेजने के लिए कहा गया है।
पश्चिम बंगाल में यह प्रशासनिक बदलाव ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली तृणमूल कांग्रेस सरकार द्वारा राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभ्यास की आलोचना के मद्देनजर किया गया। कुछ राजनीतिक हलकों का मानना है कि यह कदम चुनावों के दौरान प्रशासनिक निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। राज्य में विधानसभा चुनाव के लिए मतदान 23 और 29 अप्रैल को दो चरणों में होगा और मतगणना चार मई को होगी।