Twisha Sharma Murder Case: CBI Takes Over Amid Shocking Revelations
नई दिल्ली में ट्विशा शर्मा की मौत का मामला
नई दिल्ली: नोएडा की पूर्व मॉडल और मिस पुणे खिताब विजेता ट्विशा शर्मा की मृत्यु के मामले में एक नया मोड़ आया है। सीबीआई ने इस हाई-प्रोफाइल 'दहेज मृत्यु' मामले की जांच अपने हाथ में लेने से पहले मध्य प्रदेश पुलिस की विशेष जांच टीम ने मुख्य आरोपी और ट्विशा के पति समर्थ सिंह से तीन घंटे से अधिक समय तक गहन पूछताछ की।
चौंकाने वाले तथ्य
पूछताछ के दौरान कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं, जिनमें गर्भावस्था, अबॉर्शन के बाद का तनाव और सात लाख रुपये के लेन-देन का उल्लेख शामिल है। सुप्रीम कोर्ट के सख्त रुख के बाद केंद्रीय एजेंसी ने मामले की गहराई में जाना शुरू कर दिया है।
अबॉर्शन और रिश्तों में तनाव
पुलिस सूत्रों के अनुसार, सीबीआई को केस डायरी सौंपने से पहले एसआईटी ने न केवल समर्थ सिंह से पूछताछ की, बल्कि अपराध स्थल का लगभग दो घंटे तक पुनर्निर्माण भी किया। समर्थ सिंह, जो पेशे से वकील हैं, ने जांचकर्ताओं को बताया कि ट्विशा अपने गर्भावस्था के समाप्त होने के बाद से डिप्रेशन में थीं। उन्होंने यह भी कहा कि जब ट्विशा को अपनी प्रेग्नेंसी के बारे में पता चला, तब से उनके वैवाहिक संबंधों में तनाव बढ़ गया था। उन्होंने यह भी दावा किया कि उन्होंने ट्विशा को सात लाख रुपये दिए थे।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोट के निशान
33 वर्षीय ट्विशा शर्मा 12 मई को भोपाल में संदिग्ध परिस्थितियों में मृत पाई गई थीं। ससुराल पक्ष ने इसे आत्महत्या का मामला बताया, जबकि मायके पक्ष ने हत्या और साजिश का आरोप लगाया है। समर्थ ने ट्विशा को रात करीब 12:05 बजे एम्स अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
मौत का कारण
प्रारंभिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत का कारण दम घुटना बताया गया है, लेकिन शरीर पर कई चोटों के निशान भी मिले हैं। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एम्स दिल्ली की एक विशेषज्ञ टीम से दूसरा पोस्टमार्टम भी कराया गया है, जिसकी रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है। ट्विशा के परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से समर्थ और उसकी मां गिरिबाला सिंह ने कम दहेज मिलने के कारण ट्विशा को मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया।
सीबीआई की कार्रवाई
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए जांच को तुरंत सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया। शीर्ष अदालत ने दोनों पक्षों को सख्त निर्देश दिए कि कोई भी परिवार मीडिया में बयानबाजी करके चल रही जांच को प्रभावित न करे।
समर्थ की गिरफ्तारी के आधार
अदालत के आदेश के तुरंत बाद, सीबीआई की स्पेशल क्राइम यूनिट ने भोपाल में जांच शुरू कर दी। केंद्रीय एजेंसी ने भारतीय न्याय संहिता की धारा 80(2), 85, और 3(5) के साथ-साथ दहेज निषेध अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत समर्थ सिंह और पूर्व जज गिरिबाला सिंह के खिलाफ नामजद एफआईआर दर्ज की है।