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USCCB Criticizes Trump's Remarks on Pope Leo XIV

The United States Conference of Catholic Bishops (USCCB) has criticized President Donald Trump's recent comments targeting Pope Leo XIV. In a statement, USCCB emphasized that the Pope should not be viewed as a political rival but as a spiritual leader. Archbishop Paul S. Coakley expressed disappointment over Trump's remarks, labeling them as inappropriate and divisive. The controversy arose after Trump criticized the Pope's views on U.S. foreign policy, claiming that if he had not been elected, Pope Leo would not have been appointed. This situation highlights the ongoing tensions between the U.S. administration and the Vatican regarding global issues.
 

USCCB Responds to Trump's Comments

नई दिल्ली। अमेरिका के कैथोलिक बिशप्स का सम्मेलन (USCCB) ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की हालिया सोशल मीडिया टिप्पणियों की निंदा की है। ट्रंप ने पोप लियो XIV पर निशाना साधा था। USCCB ने स्पष्ट किया कि पोप उनके प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और उन्हें राजनीतिक दृष्टिकोण से नहीं देखा जाना चाहिए। रविवार को जारी एक बयान में USCCB के अध्यक्ष आर्कबिशप पॉल एस कोक्ले ने ट्रंप की टिप्पणियों पर निराशा व्यक्त की और उन्हें अनुचित तथा विभाजनकारी बताया। बयान में कहा गया कि यह दुखद है कि राष्ट्रपति ने होली फ़ादर के बारे में अपमानजनक शब्दों का प्रयोग किया। पोप लियो उनके प्रतिद्वंद्वी नहीं हैं और न ही वह कोई राजनेता हैं। वह क्राइस्ट के प्रतिनिधि हैं, जो सुसमाचार की सच्चाई के आधार पर और लोगों की आत्माओं की देखभाल के लिए बोलते हैं।


ये टिप्पणियाँ तब आईं जब ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में पोप लियो की आलोचना की, जिससे अमेरिकी प्रशासन और वेटिकन के बीच तनाव बढ़ गया। ट्रंप ने अपनी पोस्ट में अमेरिकी विदेश नीति पर पोप की टिप्पणियों की कड़ी आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि यदि वह राष्ट्रपति नहीं चुने गए होते, तो पोप फ्रांसिस के निधन के बाद पोप लियो को अगला पोप नियुक्त नहीं किया जाता। ट्रंप ने पोप पर अपराध के मामलों में नरम रुख अपनाने और विदेश नीति के लिए बुरा होने का आरोप लगाया। यह टिप्पणी पोप लियो द्वारा वैश्विक संघर्षों, जिसमें ईरान से जुड़ा मौजूदा तनाव भी शामिल है, के प्रति वॉशिंगटन के रवैये की हालिया आलोचना के बाद आई है। पोप ने शांति और बातचीत का आह्वान किया था। ट्रंप ने अपने बयान में यह भी कहा कि पोप ईरान द्वारा परमाणु हथियार हासिल करने और विदेशों में अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जैसे मुद्दों पर नरम रुख अपनाते हैं। उन्होंने अपने प्रशासन की नीतियों का बचाव करते हुए कहा कि उन्हें भारी बहुमत से इसलिए चुना गया था ताकि वे कानून-व्यवस्था के कड़े उपाय लागू कर सकें और एक आक्रामक विदेश नीति अपना सकें।