USS George Bush: अमेरिकी युद्धपोत ने हूती विद्रोहियों के खतरे से बचने के लिए बदला मार्ग
अमेरिकी युद्धपोत का लंबा मार्ग
6000 नाविक और 3 डेस्ट्रॉयर भी साथ
USS George Bush, वॉशिंगटन डीसी: अमेरिका का विशाल एयरक्राफ्ट कैरियर USS जॉर्ज एचडब्ल्यू बुश अब एक लंबा मार्ग अपनाते हुए अफ्रीका का चक्कर लगाकर ईरान की ओर बढ़ रहा है। रिपोर्टों के अनुसार, रेड सी में हूती विद्रोहियों के खतरे के कारण यह जहाज सीधा रास्ता छोड़कर अधिक दूरी तय कर रहा है।
फोर्ब्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी कैरियर आमतौर पर जिब्राल्टर, भूमध्य सागर और स्वेज नहर के रास्ते रेड सी से गुजरता है, लेकिन इस बार अमेरिकी नौसेना ने यह मार्ग नहीं चुना है। इस कैरियर के साथ तीन डेस्ट्रॉयर और लगभग 6,000 नाविक भी हैं। दो अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि यह स्ट्राइक ग्रुप मध्य पूर्व में तैनाती के लिए रवाना हुआ है।
हूती विद्रोहियों से अमेरिका की चिंता
यमन के हूती विद्रोहियों से डरा अमेरिका
अमेरिकी युद्धपोत का इतना लंबा मार्ग अपनाना असामान्य है। पेंटागन ने आधिकारिक रूप से कारण नहीं बताया है, लेकिन यह स्पष्ट है कि अफ्रीका का मार्ग अपनाने से यह जहाज लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा है। हाल के वर्षों में इस क्षेत्र को यमन के हूती विद्रोहियों ने असुरक्षित बना दिया है।
हूती विद्रोहियों का ईरान से समर्थन
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन, 2024 और 2025 में अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को बना चुके निशाना
हूती विद्रोहियों को ईरान का समर्थन प्राप्त है और वे पहले भी लाल सागर और बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर ड्रोन और मिसाइल हमले कर चुके हैं। 2024 और 2025 में हूती हमलों में अमेरिकी और व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया गया था। हाल के महीनों में भी उन्होंने हमले फिर से शुरू करने की धमकी दी है, जिससे यह क्षेत्र असुरक्षित बना हुआ है।
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट का महत्व
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट से बच रहा अमेरिकी जहाज
बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट को दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में गिना जाता है। यह रेड सी को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और हर साल लगभग 20,000 जहाज यहां से गुजरते हैं। वैश्विक व्यापार का लगभग 10% इसी मार्ग से होता है, विशेष रूप से तेल और गैस की आपूर्ति के लिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह मार्ग भौगोलिक दृष्टि से भी चुनौतीपूर्ण है।