अंकिता भंडारी के माता-पिता को इंडिया गेट पर धरने के दौरान हिरासत में लिया गया
इंडिया गेट पर धरना
अंकिता भंडारी को न्याय दिलाने के लिए उनके माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना दिया, जहां पुलिस ने उन्हें गुरुवार सुबह चार बजे हिरासत में लिया। हालांकि, बाद में उन्हें रिहा कर दिया गया।
उनके साथ धरने में शामिल कुछ कांग्रेस नेताओं को भी पुलिस ने रोका, लेकिन उन्हें भी जल्द ही छोड़ दिया गया।
अंकिता के माता-पिता बुधवार को उत्तराखंड से दिल्ली आए थे और अपनी बेटी की हत्या के लिए जिम्मेदार 'वीआईपी' के राज्यपाल बनने के खिलाफ धरने पर बैठे थे। कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी धरना स्थल पर जाकर उनसे मुलाकात की।
कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी ने अंकिता के माता-पिता की हिरासत की निंदा की और न्याय की मांग की।
खरगे ने कहा, "प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलिस भेजकर अंकिता के माता-पिता को गिरफ्तार करवा दिया। यह 'वीआईपी' दुष्यंत गौतम को बचाने के लिए किया गया है।"
उन्होंने इसे सत्ता के दमन का उदाहरण बताते हुए कहा कि यह शर्मनाक है कि एक बेटी को खो चुके माता-पिता के साथ ऐसा व्यवहार किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने कहा कि चार साल से अंकिता के परिवार को न्याय नहीं मिला, जबकि एक 'वीआईपी' आरोपी को संरक्षण मिला है।
पार्टी का आधिकारिक बयान
कांग्रेस ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पेज पर लिखा कि अंकिता के माता-पिता शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उन्हें रात के अंधेरे में हिरासत में लिया गया।
पार्टी ने गृह मंत्री अमित शाह की पुलिस को जिम्मेदार ठहराया और सवाल किया कि क्या अपनी बेटी की हत्या के मामले में न्याय मांगना अपराध है।
कांग्रेस ने यह भी पूछा कि दुष्यंत गौतम भाजपा के लिए इतने महत्वपूर्ण क्यों हैं कि उन्हें बचाने के लिए माता-पिता को अपमानित किया जा रहा है।
अंकिता भंडारी का मामला
यह ध्यान देने योग्य है कि अंकिता भंडारी की हत्या 18 सितंबर 2022 को ऋषिकेश में हुई थी। वह वनंतरा रिज़ॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में कार्यरत थीं।
इस मामले में रिज़ॉर्ट के मालिक पुलकित आर्य, सहायक प्रबंधक अंकित गुप्ता और प्रबंधक सौरभ भास्कर को गिरफ्तार किया गया था। इन आरोपियों ने अपने अपराध को स्वीकार किया है और उन्हें अदालत द्वारा उम्रकैद की सजा सुनाई गई है।