अंबाला में बाल श्रम से 4 बच्चों को मुक्त कराया गया
विशेष अभियान के तहत बच्चों को रेस्क्यू किया गया
अंबाला। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जिला युवा विकास संगठन, बाल कल्याण समिति, जिला बाल संरक्षण इकाई, एएचटीयू, राज्य अपराध शाखा और श्रम विभाग ने मिलकर बाल श्रम के खिलाफ एक विशेष अभियान चलाया। इस अभियान के दौरान चार बच्चों को बाल श्रम से मुक्त कराया गया।
जिला उपायुक्त, अंबाला ने बाल श्रम से संबंधित मामलों के लिए जिला टास्क फोर्स (DTF) का गठन किया है। प्राप्त शिकायतों के आधार पर श्रम विभाग और DTF टीम ने शाहजादपुर और नारायणगढ़ में निरीक्षण किया। इस दौरान, शाहजादपुर के मुख्य बाजार से दो बच्चों को किराना स्टोर से, एक बच्चे को कबाड़ी की दुकान से और एक बच्चे को ऑटो स्टोर से रेस्क्यू किया गया।
बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण और शेल्टर होम में भेजना
रेस्क्यू के बाद, शाहजादपुर पुलिस स्टेशन में डीडीआर दर्ज की गई और बच्चों की मेडिकल जांच सरकारी स्वास्थ्य केंद्र में कराई गई। इसके बाद, बच्चों को बाल कल्याण समिति, अंबाला की अध्यक्ष रंजीता सचदेवा के समक्ष पेश किया गया।
बच्चों ने बताया कि वे उत्तर प्रदेश और बिहार के निवासी हैं और रोजगार की तलाश में यहां आए थे। बाल कल्याण समिति ने सभी बच्चों को राधाकृष्णन बाल आश्रम, नारायणगढ़ में भेज दिया।
बाल श्रम कानून का उल्लंघन गंभीर अपराध है
जिला युवा विकास संगठन के समन्वयक अजय तिवारी ने कहा कि किसी भी बच्चे से मजदूरी कराना या उसे शिक्षा से वंचित रखना भारतीय कानून के तहत गंभीर अपराध है। हर बच्चे का शिक्षा, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अधिकार है।
यदि किसी बच्चे से मजदूरी कराई जा रही है या वह किसी प्रकार के शोषण का शिकार हो रहा है, तो इसकी सूचना तुरंत चाइल्ड हेल्पलाइन 1098, बाल कल्याण समिति, स्थानीय पुलिस या जिला युवा विकास संगठन को दें।
जिला युवा विकास संगठन (ZYVS) बच्चों से संवाद और परामर्श (काउंसलिंग) कर रहा है, ताकि उनके माता-पिता का पता लगाकर उन्हें अंबाला बुलाया जा सके। इस अभियान में डीएलएसए से पीएलवी, एएचटीयू और राज्य अपराध शाखा से एस.आई. नरेंद्र, जसविंदर और सुमनरवीत, जिला बाल संरक्षण इकाई से रंधीर, श्रम विभाग से श्रम निरीक्षक सुरेंद्र और जिला युवा विकास संगठन से हरविंदर सिंह हुंदल एवं हरदीप सिंह नडियाली शामिल थे।