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अकासा एयर ने किराए में वृद्धि की, नए नियम 15 मार्च से लागू

अकासा एयर ने 15 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर ईंधन अधिभार लगाने की घोषणा की है, जिससे यात्रियों को 199 से 1300 रुपये तक अधिक भुगतान करना होगा। यह कदम पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि के कारण उठाया गया है। इंडिगो जैसी अन्य एयरलाइनों ने भी इसी तरह के निर्णय लिए हैं। जानें इस नए नियम का यात्रियों पर क्या प्रभाव पड़ेगा और कब से लागू होगा।
 

किराए में वृद्धि का कारण


199 से 1300 रुपये तक की वृद्धि, घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों पर लागू होंगे नए नियम


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का प्रभाव विमानन क्षेत्र पर स्पष्ट रूप से देखा जा रहा है। खाड़ी देशों से ईंधन की आपूर्ति में रुकावट के कारण इसकी उपलब्धता पर दबाव बना हुआ है। हालांकि, सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि करने से इनकार किया है। इसके विपरीत, जेट फ्यूल की कीमतें काफी बढ़ गई हैं, जिसके चलते विमानन कंपनियों को अपने किराए में वृद्धि करनी पड़ रही है।


अकासा एयर ने घोषणा की है कि 15 मार्च से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन अधिभार (फ्यूल सरचार्ज) लागू किया जाएगा। एयरलाइन के अनुसार, यह अतिरिक्त शुल्क घरेलू उड़ानों के लिए 199 रुपये से लेकर 1,300 रुपये तक होगा। इस बदलाव के कारण यात्रियों को अपनी यात्रा के लिए अधिक खर्च करना होगा।


यात्रियों पर प्रभाव और लागू होने की तिथि

यह नया ईंधन अधिभार 15 मार्च, 2026 से प्रभावी होगा। इसका मतलब है कि इस तिथि के बाद बुक किए गए सभी टिकटों पर यह शुल्क लागू होगा। यात्रियों को अपनी यात्रा की योजना बनाते समय इस अतिरिक्त लागत को ध्यान में रखना होगा। यह कदम हवाई यात्रा को महंगा बना सकता है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण जेट फ्यूल की कीमतों में वृद्धि के चलते पहले ही एअर इंडिया, इंडिगो और एअर इंडिया एक्सप्रेस ने इसी तरह के निर्णय लिए हैं।


इंडिगो ने भी बढ़ाया किराया

हाल ही में, भारत की सबसे बड़ी विमानन कंपनी इंडिगो ने अपनी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए ईंधन अधिभार लगाने का निर्णय लिया था। इंडिगो के बयान के अनुसार, यह अधिभार 425 से 2,300 रुपये तक होगा। कंपनी ने स्पष्ट किया कि यह वृद्धि घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों उड़ानों पर लागू होगी। यह निर्णय जेट ईंधन की कीमतों में लगातार वृद्धि के कारण लिया गया है।


इसका सीधा असर विमानन कंपनियों के परिचालन लागत पर पड़ रहा है। ईंधन लागत विमानन कंपनियों के कुल खर्च का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होती है। इस अधिभार का उद्देश्य बढ़ती परिचालन लागत के बोझ को कम करना है। यात्रियों को टिकट बुक करते समय इस अतिरिक्त शुल्क का ध्यान रखना होगा। एयरलाइन ने कहा कि वह बाजार की स्थितियों की लगातार निगरानी करती रहेगी।