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अखिलेश यादव ने यूपी सरकार पर उठाए सवाल, निवेश के एमओयू पर उठे संदेह

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि उसने कई कंपनियों के साथ निवेश के समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। एक रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन कंपनियों के प्रमोटर्स की साख भी संदिग्ध है। अखिलेश ने इस मुद्दे पर सोशल मीडिया पर अपनी चिंता व्यक्त की है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि यूपी में निवेश के दावों पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।
 

यूपी में निवेश के दावों पर सवाल


यूपी ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट: उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने शनिवार को भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया। समाजवादी पार्टी के नेता ने एक रिपोर्ट के संदर्भ में भाजपा पर कटाक्ष किया, जिसमें कहा गया है कि योगी सरकार ने राज्य में हजारों करोड़ रुपये के निवेश के लिए कई समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। इनमें से कुछ कंपनियों का कोई स्पष्ट कॉरपोरेट रिकॉर्ड नहीं है, और उनके प्रमोटर्स की विश्वसनीयता भी संदिग्ध है।


एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2023 में यूपी सरकार ने ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट का आयोजन किया था। इस दौरान कई कंपनियों और संस्थाओं ने राज्य में बड़े निवेश का आश्वासन दिया। हालांकि, आरजी स्ट्रैटेजीज़ ग्रुप, जिसने 1.65 लाख करोड़ रुपये के एमओयू पर हस्ताक्षर किए, का भारत सरकार के कॉर्पोरेट मंत्रालय की वेबसाइट पर कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं है। इसके अलावा, 40 हजार करोड़ रुपये के निवेश का दावा करने वाले शैक्षणिक संस्थान में केवल 600 छात्र हैं और उसकी वित्तीय स्थिति भी कमजोर है।


रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट में 1400 करोड़ रुपये के निवेश के एमओयू करने वाले एनजीओ के बारे में जानकारी प्राप्त करना भी कठिन साबित हुआ। इस संस्था से जुड़े एक व्यक्ति ने बताया कि इसके निदेशक पर कई लोगों का पैसा बकाया है। इस रिपोर्ट के संदर्भ में अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर लिखा, 'भाजपाइयों के साथी ही नहीं, इनकी कंपनियाँ भी अनरजिस्टर्ड निकलीं। यूपी में निवेश नहीं, भाजपाई भ्रष्टाचारियों के बीच टुर्नामेंट हो रहा है।'