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अखिलेश यादव ने लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की मरम्मत पर उठाए सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर उठते सवालों के बीच, समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सड़क की मरम्मत के दौरान पंखों के उपयोग पर कटाक्ष किया है। उन्होंने भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हाल ही में हुआ, वह अब मरम्मत की आवश्यकता में है। इसके साथ ही, उन्होंने 'अटल प्रोग्रेस वे' परियोजना पर भी सवाल उठाए, यह पूछते हुए कि क्या यह योजना कभी पूरी होगी या केवल कागज़ों में ही रह जाएगी।
 

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की स्थिति पर सवाल

लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे: उद्घाटन के बाद से ही लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे की गुणवत्ता पर सवाल उठते रहे हैं। हाल ही में, मरम्मत कार्य के दौरान सड़क की सतह को सुखाने के लिए पंखों का उपयोग करने की तस्वीरें सामने आई हैं। इस पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर कटाक्ष किया है। उन्होंने कहा कि जिस एक्सप्रेसवे का उद्घाटन कुछ हफ्ते पहले हुआ, वह अब मरम्मत की आवश्यकता में है, ऐसे में उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?

पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस मुद्दे पर एक तस्वीर साझा की है, जिसमें सड़क को सुखाने के लिए पंखे लगाए गए हैं। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा, "ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो, उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है, ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है, उस पर चलने का जोखिम कौन उठाएगा?"

ये है भाजपाई तरक़्क़ी की नई हवा… कुछ दिनों पहले ही जिसका उद्घाटन हुआ हो उस सड़क को मरम्मत की ज़रूरत पड़ गई और एक्सप्रेस स्पीड से मरम्मत को सुखाने के लिए पंखे का इस्तेमाल किया जा रहा है ये भी हास्यास्पद है। 2-3 हफ़्ते में ही जिस एक्सप्रेसवे का दम उखड़ने लगा है उस पर चलने का जोखिम… pic.twitter.com/iIycX2fI4O

— Akhilesh Yadav (@yadavakhilesh) August 6, 2026

कन्नौज से समाजवादी पार्टी की सांसद ने इसी संदर्भ में राज्य सरकार की प्रस्तावित ‘अटल प्रोग्रेस वे’ परियोजना पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आगे लिखा, "सवाल ये भी है कि ‘अटल प्रोग्रेस वे’ योजना में ही रहेगा या कभी बनेगा भी… या काग़ज़ों में बनकर उसका ‘हिस्सा-बाँट’ हो चुका है। भाजपा राज में हुआ हर निर्माण चलता कम है… धँसता, ढहता, गिरता ज़्यादा है।"