×

अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का नया समय

अटारी-वाघा बॉर्डर पर बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का समय अब शाम 6 बजे से शुरू होगा। यह बदलाव गर्मी के मौसम को ध्यान में रखते हुए किया गया है, ताकि दर्शकों को बेहतर अनुभव मिल सके। जानें इस समारोह के बारे में और क्या-क्या सावधानियाँ रखनी हैं।
 

अमृतसर में बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी का समय बदला

अमृतसर: भारत और पाकिस्तान की अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित अटारी-वाघा बॉर्डर पर होने वाली प्रसिद्ध बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने गर्मी और मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए परेड के समय में बदलाव किया है। यह नया नियम 1 मई से लागू हो गया है।


परेड का नया समय


इस भव्य परेड का समय अब 30 मिनट आगे बढ़ा दिया गया है। पहले यह शाम 5:30 बजे शुरू होती थी, लेकिन अब इसे शाम 6:00 बजे से 6:30 बजे तक आयोजित किया जाएगा। BSF अधिकारियों के अनुसार, गर्मियों में दिन लंबे होने और शाम को तेज धूप के कारण दर्शकों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा था, इसलिए यह निर्णय लिया गया है।


पर्यटकों की सुविधा के लिए बदलाव


हर दिन हजारों पर्यटक इस देशभक्ति से भरी परेड का हिस्सा बनने के लिए अमृतसर आते हैं। 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारों के बीच होने वाली इस परेड का अनुभव पर्यटकों के लिए यादगार हो, इसलिए समय में यह बदलाव किया गया है। अधिकारियों का मानना है कि आधे घंटे की देरी से तापमान में थोड़ी कमी आएगी, जिससे दर्शक बेहतर तरीके से परेड का आनंद ले सकेंगे।


बॉर्डर पर जाने से पहले ध्यान रखें ये बातें


यदि आप अटारी-वाघा बॉर्डर जाने की योजना बना रहे हैं, तो कुछ आवश्यक बातों का पालन करना जरूरी है। यह सेरेमनी पूरी तरह से निशुल्क है, लेकिन गैलरी में सीमित बैठने की क्षमता के कारण परेड शुरू होने से कम से कम 2-3 घंटे पहले पहुंचना बेहतर रहेगा।


सुरक्षा कारणों से दर्शकों को एक सरकारी फोटो आईडी प्रूफ अपने साथ रखना अनिवार्य है। मोबाइल फोन ले जाने की अनुमति है, लेकिन बैग, ब्रीफकेस या अन्य इलेक्ट्रॉनिक सामान लाना पूरी तरह से वर्जित है। गर्मी के मौसम को देखते हुए पानी की बोतल और सिर ढकने के लिए टोपी या कपड़ा साथ रखना न भूलें।


जोश और अनुशासन का अद्भुत संगम


अटारी-वाघा बॉर्डर पर होने वाली यह बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी दशकों से दोनों देशों के बीच आकर्षण का केंद्र रही है। इसमें भारतीय और पाकिस्तानी जवान अपनी पारंपरिक वर्दी में जोश, अनुशासन और उच्च किक प्रदर्शन के साथ कदमताल करते हैं। सूर्यास्त से ठीक पहले झंडा उतारने की यह प्रक्रिया देखने लायक होती है, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है।