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अन्नपूर्णा जयंती: मां अन्नपूर्णा के लिए विशेष भोग, घर में होगी समृद्धि

अन्नपूर्णा जयंती, जो 4 दिसंबर को मनाई जाएगी, देवी पार्वती के अन्नपूर्णा स्वरूप को समर्पित है। इस दिन भक्त विशेष भोग अर्पित करते हैं, जिससे घर में अन्न और धन की कमी नहीं होती। जानें मां अन्नपूर्णा को प्रिय 5 भोग और उनके महत्व के बारे में।
 

अन्नपूर्णा जयंती का महत्व


4 दिसंबर को मनाई जाएगी अन्नपूर्णा जयंती
अन्नपूर्णा जयंती हर साल मार्गशीर्ष महीने की पूर्णिमा को मनाई जाती है। यह दिन देवी पार्वती के अन्नपूर्णा रूप को समर्पित है, जिन्होंने धरती पर अन्न के संकट को समाप्त किया। इस वर्ष, यह पर्व गुरुवार, 04 दिसंबर को मनाया जाएगा। इस दिन रसोई, चूल्हा और अन्न की विशेष पूजा की जाती है।


मान्यता है कि जो भक्त इस दिन देवी को श्रद्धा से उनके प्रिय भोग अर्पित करते हैं, उनके घर में अन्न और धन की कभी कमी नहीं होती। आइए जानते हैं मां अन्नपूर्णा को प्रिय भोग के बारे में।


मां अन्नपूर्णा के लिए प्रिय 5 भोग


  • चावल की खीर: खीर मिठास और समृद्धि का प्रतीक है। माता अन्नपूर्णा को चावल और दूध से बनी खीर का भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है। खीर में तुलसी का पत्ता डालना न भूलें।

  • पूड़ियां: यह पर्व अन्न के महत्व को दर्शाता है, इसलिए पूरियों का भोग अवश्य लगाएं। पूरियां शुद्ध घी में तली हुई होनी चाहिए और इसे सब्जी के साथ अर्पित करें।

  • बेसन के लड्डू: बेसन भगवान विष्णु को प्रिय है। मां अन्नपूर्णा को पीले रंग की चीजें अर्पित करने से घर में ज्ञान और समृद्धि आती है। इसलिए शुद्ध घी और बेसन से बने लड्डू भोग में शामिल करें।

  • पांच प्रकार के फल: माता अन्नपूर्णा को कम से कम पांच प्रकार के मौसमी फलों का भोग अर्पित करना चाहिए। ऐसा करने से देवी की कृपा प्राप्त होती है।

  • गुड़ और तिल का मिश्रण: पौष महीने में तिल का महत्व बढ़ जाता है। गुड़ ऊर्जा और मिठास का प्रतीक है। गुड़ और तिल से बनी चीजें माता को अर्पित करें। इससे घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और धन की रुकावटें दूर होती हैं。