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अन्ना हजारे ने सोनम वांगचुक के समर्थन में सरकार से संवाद की अपील की

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ने के बाद अन्ना हजारे ने सरकार से संवाद की अपील की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अनशन पर बैठे किसी व्यक्ति की सहनशक्ति की परीक्षा लेना उचित नहीं है। वांगचुक ने शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग की है, जिसमें NEET और अन्य परीक्षाओं में अनियमितताओं का मुद्दा शामिल है। जानें इस मामले में अन्ना हजारे का क्या कहना है और आंदोलन की प्रमुख मांगें क्या हैं।
 

सोनम वांगचुक की तबीयत बिगड़ी

नई दिल्ली - सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की तबीयत अचानक बिगड़ने के बाद उन्हें सफदरजंग अस्पताल में भर्ती कराया गया है। इस बीच, वरिष्ठ समाजसेवी अन्ना हजारे ने सरकार से बातचीत का रास्ता अपनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक अनशन पर बैठे किसी व्यक्ति की सहनशक्ति की परीक्षा लेना उचित नहीं है और ऐसे मामलों का समाधान संवाद के माध्यम से ही संभव है।


सरकार को चुप्पी तोड़ने की आवश्यकता

अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार को इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी समाप्त करनी चाहिए। उनके अनुसार, सरकार को आंदोलनकारियों से बातचीत करनी चाहिए, चाहे वह उनकी मांगों को स्वीकार करे या अस्वीकार। लोकतंत्र में संवाद ही किसी भी विवाद का सबसे प्रभावी समाधान होता है।


अनशन के दौरान स्वास्थ्य में गिरावट

सोनम वांगचुक जंतर-मंतर पर अपनी विभिन्न मांगों को लेकर अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठे थे। अनशन के 21वें दिन उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए सफदरजंग अस्पताल भेजा। अस्पताल के सूत्रों के अनुसार, लंबे समय तक ठोस भोजन न लेने के कारण उन्हें कमजोरी और डिहाइड्रेशन के लक्षण दिखाई दिए। हालांकि, भर्ती के समय उनका रक्तचाप, नाड़ी और ऑक्सीजन स्तर सामान्य था। डॉक्टरों की टीम उनकी सेहत पर लगातार नजर रखे हुए है।


आंदोलन की प्रमुख मांगें

वांगचुक और उनके समर्थक संगठनों ने शिक्षा व्यवस्था से जुड़े कई मुद्दों को उठाया है। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि NEET और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने छात्रों का भरोसा कमजोर किया है। उनकी मांग है कि परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार किए जाएं, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली की निष्पक्ष जांच हो और पेपर लीक मामलों की पारदर्शी जांच सुनिश्चित की जाए। इसके साथ ही, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी आंदोलन का एक प्रमुख हिस्सा है।


संवाद का महत्व

अन्ना हजारे ने कहा कि सरकार और आंदोलनकारियों के बीच सकारात्मक बातचीत शुरू होने से समाधान का रास्ता निकल सकता है। उनका मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में टकराव की बजाय संवाद और सहमति से ही स्थायी समाधान संभव है।