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अभिजीत दीपके का 'स्कूल ठीक करो' अभियान: सरकारी स्कूलों की अनदेखी पर उठाए सवाल

अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत की है, जिसमें उन्होंने सरकारी स्कूलों की अनदेखी पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि चाहे कोई भी राजनीतिक पार्टी सत्ता में रही हो, सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। दीपके ने माता-पिता और सरपंचों से अपील की है कि वे स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं का ऑडिट करें। जानें उनके विचार और योजनाएं इस अभियान के तहत।
 

अभिजीत दीपके का नया अभियान

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संयोजक अभिजीत दीपके ने महाराष्ट्र के हिंगोली में 'स्कूल ठीक करो' अभियान की शुरुआत करने की योजना बनाई है। उनका कहना है कि चाहे कोई भी पार्टी सत्ता में रही हो, सरकारी स्कूलों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। दीपके ने यह भी कहा कि बच्चों को समान अवसर नहीं मिल रहे हैं और गांवों के स्कूलों की स्थिति को सुधारने के लिए अब सवाल उठाने की आवश्यकता है।


अभिजीत दीपके ने क्या कहा?
दीपके ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर हिंगोली जिले के संतुक पिंपरी में अपने पैतृक गांव जाने से पहले सरकारी स्कूलों की स्थिति पर राजनीतिक दलों को निशाना बनाया। उन्होंने कहा कि सरकारी स्कूलों के ढांचे और शिक्षा के स्तर में सुधार के लिए राजनीतिक दलों ने पर्याप्त प्रयास नहीं किए हैं।


उन्होंने कहा कि अब लोगों को यह समझ आ गया है कि शिक्षा पर बात करना आवश्यक है। यह समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। चाहे किसी भी राजनीतिक पार्टी की सरकार रही हो, सरकारी स्कूलों के लिए किसी ने भी काम नहीं किया है। अब हमें सवाल पूछकर इन्हें ठीक करना होगा।


तिरंगा रैली में उठाए सवाल
दीपके ने छत्रपति संभाजीनगर में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की उपस्थिति में आयोजित तिरंगा रैली के दौरान बड़े-बड़े बैनरों के लिए खर्च किए गए पैसे पर भी सवाल उठाए।


उन्होंने कहा, तिरंगा रैली का आयोजन अच्छा है, लेकिन हर 40-50 फीट पर लगे बैनरों के लिए पैसा कहां से आया? यदि यही पैसा ग्रामीण स्कूलों और छात्रों पर खर्च किया जाता तो बेहतर होता। उन्हें यह सोचना चाहिए कि वे छात्रों का भविष्य बनाना चाहते हैं या नहीं।


दीपके ने सोमवार को गांवों में सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए एक राष्ट्रीय अभियान चलाने की घोषणा की। उन्होंने माता-पिता से स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं का ऑडिट करने की अपील की और सरपंचों से भी स्कूलों की स्थिति सुधारने की जिम्मेदारी लेने को कहा।


उन्होंने कहा, हमने नई संसद और नया प्रधानमंत्री आवास बनाया है, लेकिन अपने गांवों में नए स्कूल क्यों नहीं बना पाए? क्या हम किसानों और मजदूरों के बच्चों को अपने देश का भविष्य नहीं मानते? दीपके ने यह भी कहा कि गांवों के बच्चों को स्कूल जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है और कई जगहों पर उन्हें पीने का पानी और शौचालय जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं मिलती हैं।