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अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ मतभेदों को खारिज किया

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ मतभेदों को खारिज करते हुए उनके योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि सीजेपी चुनावी राजनीति में नहीं उतरेगी और जनदबाव समूह के रूप में काम करेगी। दीपके ने वांगचुक के अनशन को आंदोलन की ताकत बताया और बीजेपी नेताओं से मुलाकात पर सवाल उठाए। जानें इस आंदोलन के भविष्य पर उनका क्या कहना है।
 

नई दिल्ली में छात्र आंदोलन पर चर्चा


नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद छात्र आंदोलन को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हो गई हैं। इस संदर्भ में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सोनम वांगचुक के साथ मतभेद की खबरों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि आंदोलन की सफलता में वांगचुक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है और उनके योगदान को कभी भुलाया नहीं जा सकता। दीपके ने यह भी स्पष्ट किया कि सीजेपी चुनावी राजनीति में नहीं उतरेगी, बल्कि जनता के मुद्दों पर एक दबाव समूह के रूप में कार्य करती रहेगी।


दीपके का वांगचुक के साथ संबंध

एक साक्षात्कार में अभिजीत दीपके ने कहा कि उनकी और सोनम वांगचुक की सोच आज भी समान है। उन्होंने बताया कि हाल ही में दोनों के बीच बातचीत भी हुई है। दीपके के अनुसार, आंदोलन के समापन पर छात्रों का उल्लेख इसलिए किया गया क्योंकि 20 जुलाई के बाद यह आंदोलन युवाओं का आंदोलन बन गया था। हालांकि, उन्होंने दोहराया कि वांगचुक का योगदान सबसे महत्वपूर्ण रहा।


वांगचुक के अनशन की महत्ता

दीपके ने कहा कि सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल कर इस मुद्दे पर पूरे देश का ध्यान आकर्षित किया। उनके अनुसार, यदि वांगचुक यह कदम नहीं उठाते, तो शिक्षा मंत्री के इस्तीफे जैसी स्थिति शायद उत्पन्न नहीं होती। उन्होंने बताया कि वह लगातार वांगचुक से अनशन समाप्त करने की अपील कर रहे थे और उनके स्वस्थ होने पर राहत महसूस हुई।


बीजेपी नेताओं से मुलाकात पर सवाल

दीपके ने कहा कि उन्हें इस बात से कोई नाराजगी नहीं थी कि वांगचुक ने अपना अनशन समाप्त किया। उनकी आपत्ति इस बात पर थी कि बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को वांगचुक से मिलने की अनुमति मिली, जबकि उन्हें, विपक्षी नेताओं और सीजेपी के सदस्यों को मिलने नहीं दिया गया। उन्होंने इसे गंभीर सवाल बताया।


सीजेपी का चुनावी राजनीति में न उतरने का निर्णय

अभिजीत दीपके ने स्पष्ट किया कि सीजेपी का उद्देश्य चुनावी राजनीति में भाग लेना नहीं है। उन्होंने कहा कि संगठन आगे भी जनदबाव समूह के रूप में कार्य करेगा और शिक्षा, बेरोजगारी, तथा आर्थिक असमानता जैसे मुद्दों को उठाएगा। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक संस्थाओं पर लोगों का भरोसा मजबूत करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है।


आंदोलन के भविष्य पर दीपके की राय

दीपके ने आरोप लगाया कि आंदोलन को बदनाम करने के लिए असामाजिक तत्वों का इस्तेमाल किया गया। उन्होंने कहा कि हिंसा करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले छात्रों को डराने की कोशिश नहीं होनी चाहिए। उन्होंने बताया कि सीजेपी अब स्वयंसेवकों के साथ बैठक करेगी और उसके बाद अगले अभियान तथा भविष्य की रणनीति तय की जाएगी।