☰
×

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे: 1257 किलोमीटर का इकोनॉमिक कॉरिडोर अंतिम चरण में

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे, जो 1257 किलोमीटर लंबा है, अब अपने अंतिम चरण में है। इस हाईवे के चालू होने से अमृतसर से जामनगर का सफर 22 घंटे से घटकर 13 घंटे रह जाएगा। दिल्ली से जामनगर की दूरी भी 26 घंटे से घटकर 16 घंटे में पूरी होगी। यह कॉरिडोर न केवल यात्रा को तेज करेगा, बल्कि व्यापारियों की लागत में भी कमी लाएगा। जानें इस महत्वपूर्ण परियोजना के बारे में और इसके आर्थिक एवं रणनीतिक महत्व के बारे में।
 

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे का अद्यतन

अमृतसर-जामनगर एक्सप्रेसवे अपडेट: गुजरात के जामनगर से पंजाब के अमृतसर तक बनने वाला 1257 किलोमीटर लंबा छह लेन वाला इकोनॉमिक कॉरिडोर अब अपने अंतिम चरण में है। इस हाईवे के चालू होने पर अमृतसर से जामनगर का सफर 22 घंटे से घटकर केवल 13 घंटे रह जाएगा, जबकि दिल्ली से जामनगर की दूरी 26 घंटे से घटकर महज 16 घंटे में पूरी होगी।


अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर का मार्ग

अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर का मार्ग: यह कॉरिडोर उत्तर-पश्चिम भारत में तेज कनेक्टिविटी के लिए तैयार किया जा रहा है। यह गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और पंजाब को जोड़ता है और सड़क यात्रा के समय को 22 घंटे से घटाकर 13 घंटे कर देगा। इस परियोजना की कुल लागत लगभग 80 हजार करोड़ रुपये है, जो उत्तर भारत की कृषि और औद्योगिक मंडियों को सीधे कांडला और मुंद्रा बंदरगाहों से जोड़ती है। इससे व्यापारियों की ढुलाई लागत में कमी आएगी और सुरक्षा बलों के लिए सीमावर्ती आवाजाही भी आसान होगी।


कॉरिडोर की लंबाई और लागत

कॉरिडोर की लंबाई और लागत: अमृतसर-जामनगर इकोनॉमिक कॉरिडोर की कुल लंबाई 1257 किलोमीटर है, जिसमें 80 हजार करोड़ रुपये की लागत आई है। इस प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा हिस्सा राजस्थान में है, जहां 637 किलोमीटर का मार्ग पहले से ही वाहनों के लिए चालू है।


दिल्ली से जामनगर का सफर

दिल्ली से जामनगर का सफर: इस कॉरिडोर के चालू होने के बाद दिल्ली से जामनगर पहुंचने का समय 26 घंटे से घटकर केवल 16 घंटे रह जाएगा। दिल्ली-एनसीआर के यात्रियों के लिए दो विकल्प उपलब्ध होंगे: केएमपी (कुंडली-मानेसर-पलवल) या एनएच-44 के माध्यम से वेस्टर्न पेरिफेरल अथवा रोहतक होकर ट्रांस-हरियाणा एक्सप्रेसवे का रास्ता।


ग्रीनफील्ड रूट

917 किलोमीटर लंबा ग्रीनफील्ड रूट: इस राजमार्ग का 917 किलोमीटर हिस्सा ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के रूप में तैयार किया गया है, जिसमें वाहनों की अधिकतम गति सीमा 120 किलोमीटर प्रति घंटा है। पंजाब में 155 किलोमीटर का मार्ग टिब्बा गांव से मोगा, धरमकोट और बठिंडा होते हुए संगत कलां तक जाता है।


रणनीतिक और आर्थिक महत्व

रणनीतिक और आर्थिक मजबूती: यह हाईवे देश के लिए रणनीतिक और व्यापारिक दृष्टि से महत्वपूर्ण साबित होगा। यह सीधे गुजरात के कांडला और मुंद्रा पोर्ट से जुड़ता है, जिससे लॉजिस्टिक्स का खर्च कम होगा। इसके अलावा, यह बाड़मेर रिफाइनरी से भी सीधा संपर्क स्थापित करेगा, जिससे पेट्रोलियम उत्पादों की आपूर्ति में तेजी आएगी।