अमेरिका-ईरान तनाव से भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट
शेयर बाजार पर भू-राजनीतिक तनाव का प्रभाव
मुंबई: अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली शांति वार्ता के दूसरे दौर से पहले भू-राजनीतिक तनाव ने शेयर बाजार को प्रभावित किया है। अमेरिका द्वारा एक ईरानी जहाज पर कब्जा करने की खबरों ने निवेशकों में चिंता पैदा कर दी है। होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अमेरिका का कहना है कि नाकेबंदी जारी है, जबकि ईरान इसका पूर्ण नियंत्रण होने का दावा कर रहा है। इस स्थिति के चलते भारतीय शेयर बाजार में दिनभर उतार-चढ़ाव का माहौल बना रहा, जिससे निवेशकों को बड़ा झटका लगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति ने बाजार को प्रभावित किया
शुक्रवार रात यह खबर आई थी कि होर्मुज जलडमरूमध्य को खोल दिया गया है, जिससे अमेरिकी बाजारों में तेजी आई थी। इसके चलते भारतीय बाजार में भी सकारात्मक प्रभाव की उम्मीद थी, और गिफ्ट निफ्टी के 400 अंक ऊपर खुलने की संभावना थी। लेकिन शनिवार को अचानक होर्मुज के दोबारा बंद होने की खबर ने सब कुछ बदल दिया। इसने शेयर बाजार की सकारात्मक शुरुआत की उम्मीदों को ध्वस्त कर दिया और बाजार में भारी अस्थिरता देखने को मिली।
मिड और स्मॉल कैप में बिकवाली का दबाव
बाजार में मिला-जुला लेकिन तनावपूर्ण कारोबार देखने को मिला। आईटी और रियल्टी सेक्टर के शेयरों में दबाव रहा। हालांकि, ऑटो और पीएसयू बैंक के शेयरों ने बाजार को संभालने की कोशिश की, लेकिन मिड और स्मॉल कैप के शेयरों में भारी बिकवाली ने बाजार को उठने नहीं दिया। इस बिकवाली के कारण बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) पर लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप 71 हजार करोड़ रुपये घट गया। इसका मतलब है कि निवेशकों के 71 हजार करोड़ रुपये एक झटके में डूब गए।
भारतीय शेयर बाजार का अंत हरे निशान में
हालांकि, तमाम नकारात्मक खबरों और भारी वोलैटिलिटी के बावजूद, भारतीय शेयर बाजार अंततः मामूली बढ़त के साथ हरे निशान में बंद हुआ। कारोबार के अंत में बीएसई का सेंसेक्स 26.7 अंक या 0.03 फीसदी की बढ़त के साथ 78,520.30 पर बंद हुआ। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 11.30 अंक या 0.05 फीसदी चढ़कर 24,364.85 पर रुका। बीएसई के टॉप 30 शेयरों में से 18 शेयरों में गिरावट आई, जबकि 12 शेयर बढ़त के साथ बंद हुए। इस दौरान टाटा ट्रेंट के शेयरों में 3 फीसदी से अधिक की तेजी रही, जबकि लार्सन एंड टुब्रो (L&T) के शेयरों में 1 फीसदी से अधिक की गिरावट आई।