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अमेरिका-ईरान संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर प्रभाव: तेल की कीमतों में वृद्धि

अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गहरा असर पड़ रहा है। तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे कई देशों में पेट्रोल की राशनिंग हो रही है। सांसदों ने इस स्थिति को लेकर चिंता जताई है, और यह स्पष्ट हो रहा है कि यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अस्थिरता से वैश्विक तेल आपूर्ति पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे महंगाई और बढ़ने की आशंका है। जानें इस संकट के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभाव।
 

अर्थव्यवस्था पर युद्ध का असर

वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष का प्रभाव अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है। विभिन्न राज्यों में तेल की कीमतें 90 से 135 रुपए के बीच पहुंच गई हैं। ईंधन की कीमतों में वृद्धि और ऊर्जा आपूर्ति पर दबाव को लेकर अमेरिकी सांसदों ने चिंता व्यक्त की है। बुधवार को संसद में हुई सुनवाई में सांसदों ने कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज क्षेत्र में अस्थिरता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए एक बड़ा खतरा बन गई है। संसदीय समिति के वरिष्ठ सदस्य एडम स्मिथ ने कहा कि इसका आर्थिक प्रभाव अब स्पष्ट हो रहा है। उन्होंने बताया कि अमेरिका में गैस की कीमतें एक डॉलर से अधिक बढ़ चुकी हैं।


स्मिथ ने समिति को बताया कि यह संकट केवल अमेरिका तक सीमित नहीं है। कई देशों में इस समय पेट्रोल की राशनिंग की जा रही है और ये देश इस युद्ध के कारण गंभीर आर्थिक दबाव का सामना कर रहे हैं। सांसदों के अनुसार, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल की आपूर्ति में कमी के कारण वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, जिससे ईंधन और उर्वरकों की कीमतें बढ़ रही हैं। इससे महंगाई और बढ़ने की संभावना है। वहीं, अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने इस सैन्य अभियान का समर्थन करते हुए कहा कि यह आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम हर परिस्थिति में जीत के लिए लड़ते हैं।


पेंटागन के अधिकारियों ने बताया कि इस युद्ध पर अब तक लगभग 25 अरब डॉलर खर्च हो चुके हैं। रक्षा विभाग के नियंत्रक जूल्स डब्ल्यू. हर्स्ट III के अनुसार, इस राशि का अधिकांश हिस्सा हथियारों और सैन्य अभियानों पर खर्च किया गया है। सांसदों ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि क्या बढ़ती ऊर्जा कीमतों के व्यापक आर्थिक प्रभावों का सही आकलन किया जा रहा है।


जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष डैन केन ने कहा कि वैश्विक जोखिम तेजी से बढ़ रहे हैं, क्योंकि अब संघर्ष सीधे तौर पर सुरक्षा और अर्थव्यवस्था दोनों को प्रभावित कर रहा है। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक है। यहां किसी भी प्रकार की बाधा से वैश्विक आपूर्ति तुरंत प्रभावित होती है और कीमतों में उछाल आता है।


मौजूदा संघर्ष ने इस दबाव को और बढ़ा दिया है, जिससे यह चिंता गहराने लगी है कि यह स्थिति कितने समय तक जारी रहेगी और ऊर्जा पर निर्भर देशों पर इसका कितना गहरा असर पड़ेगा। अमेरिका और ईरान के बीच परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय प्रभाव को लेकर लंबे समय से तनाव बना हुआ है। खाड़ी क्षेत्र में पहले भी ऐसे संकट उत्पन्न हो चुके हैं, जिनके कारण तेल की कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है।