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अमेरिका और इजराइल का ईरान पर बड़ा हमला: क्या हैं इसके प्रभाव?

अमेरिका और इजराइल ने ईरान पर एक बड़ा हमला किया है, जिसके पीछे कई राजनीतिक और सुरक्षा कारण हैं। इस हमले में ईरानी रक्षा मंत्री और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर की मौत की खबर है। ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए इजराइल पर मिसाइलें दागी हैं। इस स्थिति का असर भारत की तेल आपूर्ति और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है। जानें इस हमले के पीछे की वजहें और इसके संभावित परिणाम।
 

हमले की पृष्ठभूमि

नई दिल्ली। अमेरिका और इजराइल ने आखिरकार ईरान पर हमला कर दिया है। जिनेवा में गुरुवार को हुई वार्ता के असफल होने के बाद हमले की तैयारियाँ तेज हो गई थीं। शनिवार की सुबह, इजराइल ने ईरान की राजधानी तेहरान समेत 10 शहरों पर बड़े पैमाने पर हमला किया। इस हमले में ईरानी रक्षा मंत्री अमीर नासिरजादेह और रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के कमांडर मोहम्मद पाकपोर की मौत की खबर आई है। इससे पहले, ईरानी समाचार एजेंसियों ने बताया कि दक्षिणी ईरान के एक स्कूल पर मिसाइल गिरने से 40 छात्राओं की जान गई और 45 अन्य घायल हुए। इस घटना का असर भारत की तेल आपूर्ति पर पड़ सकता है और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि हो सकती है।


हमले का उद्देश्य और प्रतिक्रिया

इजराइल ने इस हमले को अमेरिका के सहयोग से अंजाम दिया। हमले के बाद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक वीडियो जारी कर कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा के लिए की गई है। ईरान ने इस हमले का जवाब देते हुए इजराइल पर लगभग चार सौ मिसाइलें दागीं। इसके साथ ही, उसने कतर, कुवैत, जॉर्डन, बहरीन, सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात में मौजूद अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया। ईरान ने दुबई, जो कि संयुक्त अरब अमीरात का सबसे बड़ा शहर है, पर भी हमला किया।


हमले का राजनीतिक संदर्भ

यह हमला ईरान के परमाणु कार्यक्रम और बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम से ज्यादा, ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला खामेनेई के खिलाफ माना जा रहा है। हमले में सबसे पहले खामेनेई और राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान को निशाना बनाया गया। हालांकि, दोनों नेताओं को पहले ही सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित कर दिया गया था। इजराइल ने इस अभियान का नाम 'लियोनस् रोर' यानी शेर की दहाड़ रखा है।


बातचीत का असफल होना

इससे पहले, ईरान और अमेरिका के बीच परमाणु हथियारों पर बातचीत चल रही थी। मस्कट और जिनेवा में कई दौर की वार्ता हुई, लेकिन अमेरिका ने अपने दो सबसे बड़े युद्धपोत अरब की खाड़ी में भेज दिए और बड़ी संख्या में लड़ाकू विमानों को भी तैनात किया। ट्रंप ने हमले की चेतावनी देते हुए कहा था कि अमेरिकी सेना ईरान की मिसाइलों को नष्ट करने और उसके मिसाइल कार्यक्रम को समाप्त करने की कोशिश कर रही है। ईरान का कहना है कि वह केवल अपने परमाणु कार्यक्रम पर बात करना चाहता था, जबकि अमेरिका चाहता था कि ईरान अपना बैलेस्टिक मिसाइल कार्यक्रम बंद करे।