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अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर बढ़ता तनाव

अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप ने ईरान के शांति प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए संभावित सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी है। फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट द्वारा हमले की घटना ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर भी सख्त रुख अपनाया है। इस बीच, मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य तैनाती बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे तनाव और बढ़ सकता है।
 

तनाव की नई लहर

वॉशिंगटन: अमेरिका और इजरायल के बीच ईरान को लेकर तनाव एक बार फिर से बढ़ता हुआ दिखाई दे रहा है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया शांति प्रस्ताव को अपर्याप्त बताते हुए 3 नवंबर के मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी की संभावनाओं को खारिज नहीं किया है। इस बीच, खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैनाती को बढ़ाने की योजना बनाई जा रही है, जिससे 20,000 से अधिक नौसैनिकों और मरीन की मौजूदगी हो सकती है।


फ्लाईदुबई की उड़ान में घटना

तनाव के बीच, फ्लाईदुबई की इजरायल जा रही उड़ान में एक गंभीर घटना ने स्थिति को और भी जटिल बना दिया है। 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की उड़ान में सह-पायलट ने कथित तौर पर कप्तान पर हमला किया और विमान को नीचे गिराने की कोशिश की। घायल पायलट ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिसके बाद यात्रियों और अन्य क्रू सदस्यों ने हमलावर को काबू किया। विमान को सऊदी अरब में सुरक्षित आपात लैंडिंग कराई गई। इस घटना की जांच कई देशों की एजेंसियों द्वारा की जा रही है।


ट्रंप का बयान

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने इस घटना में सह-पायलट के ईरान से संभावित संबंधों का संकेत दिया है। जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्हें सह-पायलट के ईरान से संबंध की जानकारी मिली है, तो उन्होंने कहा कि जांच चल रही है और उन्हें मिल रही जानकारी के आधार पर ऐसा संबंध होने की संभावना है। हालांकि, उन्होंने इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत नहीं पेश किए हैं। इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी कहा है कि घटना के पीछे की असली वजह अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।


संभावित सैन्य कार्रवाई

ट्रंप ने कहा है कि यदि जांच में यह साबित होता है कि फ्लाईदुबई की घटना के पीछे ईरान का हाथ था, तो ईरान को कड़ी कार्रवाई का सामना करना पड़ेगा। इस बीच, ईरान के साथ युद्ध समाप्त करने की कूटनीतिक कोशिशें भी मुश्किल दौर में पहुंचती दिखाई दे रही हैं। ट्रंप ने ईरान के ताजा प्रस्ताव को स्वीकार करने से इनकार किया है और संकेत दिया है कि चुनाव के बाद सैन्य कार्रवाई फिर से शुरू की जा सकती है।


मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सैन्य दबाव

अमेरिकी नौसेना की अतिरिक्त तैनाती से मिडिल ईस्ट में सैन्य दबाव बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट कैरियर स्ट्राइक ग्रुप के साथ अन्य युद्धपोतों और उभयचर बलों की तैनाती की योजना बनाई जा रही है। इसके अलावा, क्षेत्र में अमेरिकी नौसैनिकों और मरीन की संख्या भी बढ़ाई जा सकती है। अमेरिका पहले भी इस साल मिडिल ईस्ट में अपनी नौसैनिक ताकत बढ़ा चुका है। अब नई तैनाती के साथ क्षेत्र में एक साथ तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर की मौजूदगी की संभावना जताई जा रही है। इससे ईरान पर अमेरिकी सैन्य दबाव और बढ़ सकता है।


परमाणु कार्यक्रम पर ट्रंप का रुख

ट्रंप ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर भी अपना रुख स्पष्ट किया है। उनका कहना है कि ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होना चाहिए। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि ईरान के साथ जारी संघर्ष का राजनीतिक असर अमेरिका में होने वाले मिडटर्म चुनाव पर पड़ सकता है, लेकिन इसके बावजूद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वह पीछे हटने के पक्ष में नहीं हैं।


अगले कदम पर नजरें

फ्लाईदुबई विमान की घटना और ईरान से उसके संभावित संबंधों की जांच के बीच अब सभी की नजरें अमेरिकी प्रशासन के अगले कदम पर हैं। फिलहाल ईरान की प्रत्यक्ष भूमिका की अंतिम पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन ट्रंप की चेतावनी और मिडिल ईस्ट में बढ़ती अमेरिकी सैन्य तैनाती ने क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा दिया है।