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अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों पर बढ़ता तनाव

अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिका ने आरोप लगाया है कि चीन ने 2020 में एक गुप्त न्यूक्लियर परीक्षण किया था, जिससे उसकी परमाणु क्षमता में तेजी से वृद्धि हुई है। इस लेख में जानें कि कैसे यह तनाव वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित कर सकता है और चीन के जवाब में अमेरिका की संभावित रणनीतियाँ क्या हो सकती हैं।
 

अमेरिका का आरोप, चीन ने 2020 में किया गुप्त न्यूक्लियर परीक्षण


नई दिल्ली: अमेरिका और चीन के बीच परमाणु हथियारों को लेकर तनाव फिर से बढ़ गया है। अमेरिकी अधिकारियों ने आरोप लगाया है कि चीन ने 2020 में एक गुप्त न्यूक्लियर परीक्षण किया था। अमेरिकी विदेश विभाग के सहायक सचिव क्रिस्टोफर येव ने सोमवार को कहा कि 22 जून 2020 को चीन के पश्चिमी क्षेत्र में लोप नूर में एक भूमिगत न्यूक्लियर परीक्षण केंद्र पर विस्फोट हुआ था।


ये विस्फोट 2.75 की तीव्रता का था, जिसकी जानकारी पड़ोसी देश कजाकिस्तान के स्टेशन से मिली। येव ने इसे एक परमाणु विस्फोट बताया और कहा कि यह माइनिंग विस्फोट से भिन्न था। यह एक सिंगल फायर एक्सप्लोजन की तरह था, जो परमाणु परीक्षण का संकेत है।


2030 तक परमाणु हथियारों की संख्या 1,000 से अधिक हो सकती है

येव ने कहा कि चीन ने जानबूझकर अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ाया है। उन्होंने बताया कि 2020 से अब तक चीन के परमाणु हथियारों की संख्या 200 से बढ़कर 600 से अधिक हो गई है। अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 1,000 से ऊपर पहुंच जाएगी। यह दावा ऐसे समय में आया है जब अमेरिका और रूस के बीच का आखिरी बड़ा परमाणु समझौता न्यू स्टार्ट संधि समाप्त हो गया है। इस संधि के खत्म होने के साथ ही दुनिया की दो सबसे बड़ी परमाणु शक्तियों के हथियारों पर लगी सीमाएं हट गई हैं, जिससे नए न्यूक्लियर हथियारों की दौड़ की आशंका बढ़ गई है।


चीन ने आरोपों को बेबुनियाद बताया

अमेरिका अब चीन और रूस से पारदर्शिता और खतरनाक हथियारों को सीमित करने की मांग कर रहा है, जबकि चीन इन आरोपों को बेबुनियाद बता रहा है। येव ने जिनेवा में संयुक्त राष्ट्र समर्थित निरस्त्रीकरण कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि न्यू स्टार्ट समझौते की सबसे बड़ी कमी यह थी कि इसमें चीन के तेजी से बढ़ते और गोपनीय परमाणु कार्यक्रम को शामिल नहीं किया गया।


अमेरिका खुद परीक्षण शुरू करने की योजना बना रहा है

चीन ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। सम्मेलन में चीन के राजदूत जियान शेन ने कहा कि अमेरिका के दावे पूरी तरह झूठे हैं। यह अमेरिका का बहाना है ताकि वह खुद परीक्षण शुरू कर सके। उन्होंने जोर देकर कहा कि चीन ने हमेशा परमाणु परीक्षण प्रतिबंध संधि का पालन किया है और पांच परमाणु शक्तियों (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस, ब्रिटेन) की प्रतिबद्धता के अनुसार कोई परीक्षण नहीं किया।


चीन का परमाणु भंडार केवल रक्षा के लिए

उन्होंने बताया कि चीन की रणनीतिक स्थिति अलग है और वह केवल रक्षा के लिए परमाणु हथियार रखता है। वॉशिंगटन में कानेर्गी एंडाउमेंट फॉर इंटरनेशनल पीस के विशेषज्ञ टोंग झाओ ने कहा कि यदि चीन ने सच में परीक्षण किया तो उसकी जिम्मेदार परमाणु शक्ति वाली छवि खराब हो सकती है और अमेरिका को परीक्षण बहाल करने का मौका मिल सकता है।