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अमेरिका का इजरायल को 2.8 अरब डॉलर का हथियार पैकेज: 40,000 भारी बम शामिल

अमेरिका का प्रशासन इजरायल के लिए 2.8 अरब डॉलर के हथियार पैकेज की योजना बना रहा है, जिसमें 40,000 भारी बम शामिल हैं। यह सौदा गाजा में चल रहे संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच सामने आया है। जानें इस प्रस्तावित सौदे के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव।
 

अमेरिका का नया हथियार सौदा

वॉशिंगटन/तेल अवीव: गाजा में चल रहे संघर्ष और अंतरराष्ट्रीय दबाव के बीच, अमेरिका का प्रशासन इजरायल के लिए 2.8 अरब डॉलर के एक बड़े हथियार सौदे की योजना बना रहा है। इस प्रस्तावित सौदे में लगभग 40,000 भारी बम शामिल हैं, जिनका वजन 2,000 पाउंड है। इनमें 20,000 एमके-84 और 20,000 बीएलयू-117 बम शामिल हैं। यह वही बम हैं, जिनकी एक खेप को पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडन के प्रशासन ने 2024 में गाजा में नागरिकों के हताहत होने की आशंका के चलते रोक दिया था।


अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इस प्रस्तावित पैकेज की जानकारी अमेरिकी कांग्रेस की संबंधित समितियों को अनौपचारिक रूप से दी जा चुकी है, लेकिन यह सौदा अभी तक अंतिम रूप नहीं ले पाया है। पहचान उजागर न करने की शर्त पर अधिकारियों ने बताया कि इस पैकेज का अधिकांश हिस्सा विदेशी सैन्य वित्त पोषण के माध्यम से उपलब्ध कराया जाएगा। इस व्यवस्था के तहत अमेरिका इजरायल को सैन्य सहायता प्रदान करता है, जिसका उपयोग अमेरिकी हथियारों की खरीद के लिए किया जाता है।


2024 में, बाइडन प्रशासन ने इजरायल को 2,000 पाउंड के बमों की एक खेप भेजने पर रोक लगा दी थी, क्योंकि उस समय प्रशासन को चिंता थी कि गाजा में इन बमों के उपयोग से नागरिकों की जान जा सकती है। ट्रंप के पुनः राष्ट्रपति बनने के बाद यह रोक हटा दी गई थी, और इसके बाद ट्रंप प्रशासन ने इजरायल के लिए कई अरबों डॉलर के हथियार सौदों को आगे बढ़ाया है।


यह नया हथियार पैकेज उस समय सामने आया है जब गाजा में युद्ध को लेकर इजरायल पर अंतरराष्ट्रीय दबाव बढ़ रहा है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजरायल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया था, जिसके परिणामस्वरूप हजारों फलस्तीनियों की मौत हुई है और गाजा के बड़े हिस्से में भारी तबाही हुई है। अमेरिका की मध्यस्थता से युद्धविराम की स्थिति बनी, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र में हिंसा और जवाबी हमलों की खबरें आती रही हैं।


2,000 पाउंड श्रेणी के बमों के विभिन्न संस्करण हैं। कुछ बम भूमिगत लक्ष्यों को भेदने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जबकि अन्य बम सतह पर विस्फोट कर बड़े क्षेत्रों में तबाही मचा सकते हैं। इजरायली सेना ने गाजा में इस्तेमाल किए गए हथियारों के बारे में सीमित जानकारी साझा की है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी निर्मित बमों का उपयोग किया गया है।


इन भारी बमों का उपयोग हमास के सुरंग नेटवर्क और अन्य सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि, घनी आबादी वाले क्षेत्रों में इनके उपयोग से नागरिकों के हताहत होने और बड़े पैमाने पर विनाश की चिंता भी जताई गई है।


यह प्रस्तावित सौदा ऐसे समय में आया है जब राष्ट्रपति ट्रंप और इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच कुछ मुद्दों पर मतभेद की खबरें सामने आई हैं। फिर भी, दोनों देशों के बीच सैन्य और रणनीतिक सहयोग जारी है। ईरान से जुड़े संघर्षों पर भी दोनों देशों की नीतियों में कुछ मतभेद देखे गए हैं। इसके बावजूद, ट्रंप प्रशासन इजरायल की सैन्य क्षमता को मजबूत करने के लिए हथियारों की आपूर्ति जारी रखने के संकेत दे रहा है।


युद्धविराम के बावजूद, गाजा में हिंसा पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है। इजरायल का कहना है कि उसके हवाई हमले सशस्त्र समूहों द्वारा किए गए हमलों और युद्धविराम के उल्लंघनों के जवाब में किए जा रहे हैं। फलस्तीनियों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने गाजा में जारी सैन्य कार्रवाई और इसके नागरिकों पर प्रभाव को लेकर चिंता जताई है।


इस प्रकार, 2.8 अरब डॉलर का यह प्रस्तावित हथियार सौदा अमेरिका-इजरायल सैन्य संबंधों और गाजा युद्ध पर अमेरिकी नीति पर एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय ध्यान केंद्रित कर रहा है।