अमेरिका का भारत के प्रति बदलता दृष्टिकोण: मार्को रूबियो का विवादास्पद बयान
भारत के प्रति अमेरिका की नई नीति
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन के अधिकारियों का भारत के प्रति दृष्टिकोण धीरे-धीरे स्पष्ट होता जा रहा है। ट्रंप ने चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ दोस्ती बढ़ाने के लिए विवादों को किनारे कर दिया है, जो भारत के लिए चिंता का विषय है। अमेरिका अब एशिया में शक्ति संतुलन बनाए रखने की पुरानी नीति से पीछे हट रहा है। वह भारत को चीन के खिलाफ एक काउंटरवेट के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि चीन के साथ संबंधों को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
इस साल नई दिल्ली में रायसीना डायलॉग के दौरान अमेरिकी विदेश उप मंत्री ने यह संकेत दिया था कि अमेरिका भारत को इतना बड़ा नहीं होने देगा कि वह एक चुनौती बन जाए। यह बयान उन्होंने भारतीय अधिकारियों और रणनीतिक विशेषज्ञों के सामने दिया था। हालांकि, ट्रंप प्रशासन के कुछ अधिकारी भारत को खुश करने वाले बयान भी देते हैं। जैसे, जब अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू कश्मीर गए, तो उन्होंने कहा कि कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है, जिस पर भारत में सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।
हालांकि, हाल ही में मार्को रूबियो द्वारा कश्मीर पर दिए गए बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कहा कि एक अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की आवश्यकता है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच संभावित संघर्ष को संभाल सके। यह बयान कई लोगों के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि इससे यह संकेत मिलता है कि अमेरिका भारत की स्थिति को सूडान और रवांडा के समान मानता है।
रूबियो का यह बयान भारत और पाकिस्तान के मुद्दे पर अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की आवश्यकता को दर्शाता है, जबकि भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि यह मुद्दा द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे पक्ष की भूमिका स्वीकार नहीं की जा सकती। यह स्थिति भारत के लिए आपत्तिजनक है, क्योंकि इससे उसकी संप्रभुता पर सवाल उठता है।
रूबियो के बयान के तुरंत बाद, भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर अमेरिका गए और उनकी रूबियो से मुलाकात हुई। हालांकि, इस दौरान रूबियो के विवादास्पद बयान पर कोई चर्चा नहीं हुई।