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अमेरिका का भारत पर 50% टैरिफ: ट्रंप के सलाहकारों की नई टिप्पणियाँ

अमेरिका ने भारत पर 50% टैरिफ लागू किया है, जिसके पीछे ट्रंप के सलाहकारों की टिप्पणियाँ हैं। उन्होंने भारत को यूक्रेन में युद्ध का जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, तो टैरिफ में कमी की जा सकती है। जानें इस विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

भारत और अमेरिका के बीच टैरिफ विवाद

अमेरिका ने भारत को यूक्रेन में युद्ध का मुख्य जिम्मेदार ठहराते हुए कहा है कि शांति की दिशा दिल्ली से होकर गुजरती है। हालांकि, अब अमेरिका के सुर थोड़े नरम होते दिख रहे हैं। 50 प्रतिशत का टैरिफ लागू हो चुका है, और ट्रंप के करीबी सलाहकार भारत को युद्ध के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, तो 24 घंटे के भीतर 25% टैरिफ में कमी की जा सकती है। लेकिन साथ ही, उन्होंने भारत को घमंडी भी बताया। ट्रंप के सलाहकार पीटर नवारो ने रूस-यूक्रेन युद्ध को मोदी का युद्ध करार दिया और कहा कि शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर जाता है।


टैरिफ का प्रभाव और नवारो की टिप्पणियाँ

नवारो ने आरोप लगाया कि भारत रूस से तेल खरीदता है, जिसका उपयोग रूस यूक्रेन के खिलाफ कर रहा है। उन्होंने कहा कि इसी कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है। नवारो ने यह भी कहा कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद करता है, तो अमेरिकी टैरिफ में 25% की कमी हो सकती है। उन्होंने यह भी बताया कि भारत के उच्च टैरिफ के कारण अमेरिका में उपभोक्ता, व्यवसाय और श्रमिक सभी प्रभावित हो रहे हैं।


ट्रंप के टैरिफ का प्रभाव

यह टिप्पणी उस समय आई है जब ट्रंप द्वारा भारतीय वस्तुओं पर 50 प्रतिशत टैरिफ लागू किया गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इसे नई दिल्ली द्वारा रूसी तेल की निरंतर खरीद से जोड़ा है। यह टैरिफ पहले से लागू 25 प्रतिशत शुल्क को दोगुना कर देता है। नवारो ने कहा कि भारत द्वारा 'छूट वाले' कच्चे तेल की खरीद से प्राप्त धन का उपयोग रूस अपनी युद्ध मशीनरी के लिए कर रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे अमेरिकी संसाधनों पर कर लगाया जा रहा है।


भारत पर टैरिफ का व्यापक असर

नवारो ने कहा कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना बंद कर दे, तो उसे तुरंत 25 प्रतिशत की छूट मिल सकती है। भारत पर लगाया गया 50 प्रतिशत शुल्क, अमेरिका द्वारा किसी भी एशियाई देश पर लगाया गया सबसे बड़ा टैरिफ है। इससे भारत के सबसे बड़े निर्यात बाजार, अमेरिका को भेजे जाने वाले 55 प्रतिशत से अधिक भारतीय सामान प्रभावित होंगे। हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और दवाइयों जैसे कुछ प्रमुख उत्पादों को फिलहाल छूट दी गई है, लेकिन कपड़ा और आभूषण जैसे श्रम-प्रधान उद्योगों पर इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।