अमेरिका की रिजीम चेंज नीति: एक गहन विश्लेषण
अमेरिका की वैश्विक नीतियों का प्रभाव
अमेरिका का लक्ष्य है कि हर देश में ऐसी सरकारें हों जो उसके हितों के अनुकूल हों। वह चाहता है कि सभी राष्ट्र उसकी कंपनियों को प्राथमिकता दें और उसके आदेशों का पालन करें। जब कोई सरकार अमेरिका के खिलाफ खड़ी होती है, तो वाशिंगटन इसे सहन नहीं करता। यही कारण है कि अमेरिका की पुरानी और विवादास्पद रिजीम चेंज नीति सक्रिय होती है।
अमेरिका की तख्तापलट की रणनीतियाँ
अमेरिका उन सरकारों को हटाने में सक्रिय है जो उसकी अपेक्षाओं के अनुरूप नहीं चलतीं। अधिकांश तख्तापलट के प्रयास गुप्त होते हैं, लेकिन इराक में सद्दाम हुसैन, अफगानिस्तान में तालिबान और वेनेजुएला में मादुरो के खिलाफ अमेरिका ने सीधे हस्तक्षेप किया।
ईरान में असफल प्रयास
पिछले वर्ष ईरान में छात्रों का आंदोलन हुआ, जिसमें अमेरिका ने समर्थन दिया, लेकिन रिजीम चेंज नहीं हो सका। दुनिया को लगता है कि अमेरिका का ध्यान परमाणु हथियारों पर है, जबकि असली उद्देश्य तेहरान में अपने अनुकूल सरकार की स्थापना करना है।
CIA की भूमिका
20वीं सदी के आरंभ से, विशेषकर द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद, अमेरिका ने अपनी शक्ति का उपयोग तख्तापलट के लिए किया। CIA ने विभिन्न तरीकों से सरकारों को गिराने का प्रयास किया, जिसमें छात्र आंदोलन, विरोध प्रदर्शन और चुनाव में धांधली शामिल हैं।
कम्युनिज्म के खिलाफ अमेरिका का संघर्ष
अमेरिका ने द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद कम्युनिस्ट और सोशलिस्ट सरकारों को निशाना बनाया। इसका मुख्य कारण यह है कि अमेरिका कम्युनिज्म को अपने लिए खतरा मानता है।
क्यूबा और कास्त्रो का मामला
क्यूबा में फिदेल कास्त्रो का अमेरिका विरोधी रुख था। CIA ने कास्त्रो को मारने के कई प्रयास किए, लेकिन सफल नहीं हो पाई। लैटिन अमेरिका में कास्त्रो का समर्थन करने वाली हर सरकार को CIA ने निशाना बनाया।
ईरान में तख्तापलट का इतिहास
1953 में, अमेरिका ने यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर ईरान के प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देग का तख्तापलट किया। यह स्पष्ट करता है कि अमेरिका का लोकतंत्र से कोई वास्तविक संबंध नहीं है।
मध्य पूर्व में दखल
अमेरिका ने मध्य पूर्व में सत्ता परिवर्तन के लिए भारी मात्रा में धन खर्च किया और कई देशों में दखल दिया। इराक में अमेरिका की कार्रवाई में लाखों लोगों की जान गई।
अमेरिका का तख्तापलट का इतिहास
अमेरिका ने कई देशों में तख्तापलट को समर्थन दिया, जैसे कि इक्वाडोर, ब्राजील, और चिली। ग्वाटेमाला में राष्ट्रपति जैकोबो अर्बन्ज का तख्तापलट भी इसी का हिस्सा था।
यातना और क्रूरता का दौर
अमेरिका ने कई देशों में सैन्य तख्तापलट को समर्थन दिया, जिसके परिणामस्वरूप लाखों लोगों को यातनाएँ सहनी पड़ीं।
सरकार बदलना आसान, व्यवस्था बदलना कठिन
किसी देश की सरकार को गिराना आसान है, लेकिन व्यवस्था में बदलाव लाना कठिन होता है। अमेरिका ने कई देशों में सरकारें बदली, लेकिन स्थायी समाधान नहीं दे पाया।