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अमेरिका की सैन्य कार्रवाई से बढ़ा पश्चिम एशिया में तनाव

पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, अमेरिका ने एक व्यापारी जहाज पर मिसाइल दागी, जो ईरान की ओर जा रहा था। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान की निर्यात क्षमताओं को सीमित करने के लिए की गई है। वहीं, ईरान ने चेतावनी दी है कि उसके समुद्री क्षेत्र में हस्तक्षेप करने वाले जहाजों को निशाना बनाया जा सकता है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके वैश्विक व्यापार पर प्रभाव।
 

अमेरिका ने चेतावनी देने के बाद की सैन्य कार्रवाई


तेहरान: अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत के बावजूद, दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियाँ जारी हैं, जिससे पश्चिम एशिया में तनाव बढ़ता जा रहा है। हाल ही में, अमेरिकी सेना ने एक व्यापारी जहाज को मिसाइल हमले से रोकने का दावा किया है जो ईरान की ओर जा रहा था।


अमेरिका का कहना है कि इस नाकेबंदी का उद्देश्य ईरान की निर्यात क्षमताओं को सीमित करना और उसकी आर्थिक स्थिति पर दबाव डालना है। दूसरी ओर, ईरान ने भी कड़ा रुख अपनाया है और चेतावनी दी है कि उसके समुद्री क्षेत्र में किसी भी प्रकार के हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


अमेरिका ने सैन्य कार्रवाई को उचित ठहराया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, गाम्बिया के झंडे वाला मालवाहक जहाज एम/वी लियान स्टार ओमान की खाड़ी की ओर बढ़ रहा था। अमेरिकी सेना ने जहाज को 20 से अधिक बार चेतावनी दी, लेकिन चालक दल ने निर्देशों का पालन नहीं किया। इसके बाद, अमेरिकी सैन्य विमान ने जहाज के इंजन कक्ष पर हेलफायर मिसाइल दागी, जिससे जहाज आगे बढ़ने में असमर्थ हो गया।


अमेरिकी सेना का कहना है कि अब यह जहाज ईरान की ओर नहीं जा रहा है और यह कार्रवाई क्षेत्र में लागू समुद्री नाकेबंदी का हिस्सा है।


अमेरिका का आरोप

अमेरिका ने आरोप लगाया है कि ईरान ने रणनीतिक होर्मुज जलडमरूमध्य और आसपास के समुद्री मार्गों पर नियंत्रण बढ़ाने की कोशिश की है, जिसके जवाब में यह कार्रवाई की गई। इस क्षेत्र से विश्व के बड़े हिस्से का तेल, गैस और अन्य महत्वपूर्ण सामान गुजरता है, इसलिए यहां तनाव वैश्विक व्यापार और ऊर्जा बाजार को प्रभावित कर सकता है।


हालांकि क्षेत्र में तनाव जारी है, 7 अप्रैल से लागू संघर्ष विराम अभी तक बना हुआ है। अमेरिका और उसके सहयोगी देशों ने इस युद्धविराम को 60 दिन और बढ़ाने की संभावना पर विचार किया है ताकि ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर नई बातचीत शुरू की जा सके।