×

अमेरिका द्वारा भारत पर नए टैरिफ का प्रभाव: जानें मुख्य बातें

अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर नए टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है, जिसका मुख्य उद्देश्य जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर रोक लगाना है। भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जबकि पहले यह 12.5 प्रतिशत होने की संभावना थी। इस लेख में अमेरिका के इस कदम के पीछे के कारण, प्रभावित देशों की सूची, और भारत पर इसके संभावित प्रभावों पर चर्चा की गई है। जानें कि यह टैरिफ नीति कैसे भारतीय निर्यात को प्रभावित कर सकती है और दोनों देशों के बीच व्यापार वार्ता का महत्व क्या है।
 

अमेरिका का नया टैरिफ


अमेरिका द्वारा टैरिफ वृद्धि: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत को एक बार फिर बड़ा झटका दिया है। ट्रंप प्रशासन ने हाल ही में भारत सहित लगभग 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर नया टैरिफ लगाने का निर्णय लिया है। अमेरिका का कहना है कि यह कदम जबरन श्रम से जुड़े उत्पादों पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। नए नियमों के अनुसार, भारत पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है, जबकि पहले यह 12.5 प्रतिशत होने की संभावना थी। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, भारत ने हाल के दिनों में जबरन श्रम से संबंधित आयात नियमों को सख्त करने के लिए कुछ नीतिगत बदलाव किए हैं, जिसके कारण इसे कम टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है। ये टैरिफ शुक्रवार रात से लागू होंगे, लेकिन जो सामान पहले से भेजा जा चुका है, उसे 28 जुलाई तक नए टैरिफ से छूट मिलेगी।


अमेरिका ने टैरिफ क्यों लगाया?

अमेरिकी सरकार का कहना है कि कई देशों की सप्लाई चेन में ऐसे उत्पाद शामिल हैं, जिनका उत्पादन जबरन श्रम के माध्यम से किया जाता है। आरोप है कि कमजोर नियमों वाले देश ऐसे उत्पादों को कम कीमत पर बेचकर अमेरिकी कंपनियों को नुकसान पहुंचाते हैं। अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमिसन ग्रीयर ने कहा कि अमेरिका लंबे समय से जबरन श्रम के खिलाफ कदम उठा रहा है और चाहता है कि उसके व्यापारिक साझेदार भी इस दिशा में सख्त कार्रवाई करें।


भारत पर कम टैरिफ का कारण

अमेरिका ने देशों को उनकी नीतियों और जबरन श्रम रोकने के प्रयासों के आधार पर अलग-अलग श्रेणियों में रखा है। जिन देशों ने जबरन श्रम से जुड़े आयात पर प्रतिबंध लगाए हैं, उन पर 10 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है। भारत इसी श्रेणी में आता है। एक अमेरिकी अधिकारी के अनुसार, प्रारंभिक प्रस्ताव में भारत पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाने की योजना थी, लेकिन दोनों देशों के बीच बातचीत और भारत की नीतिगत पहल के बाद इसे घटाकर 10 प्रतिशत कर दिया गया।


कौन से देशों पर लगा 10% टैरिफ?

भारत के अलावा, ब्रिटेन, कनाडा, मैक्सिको, बांग्लादेश, पाकिस्तान, मलेशिया, इंडोनेशिया, कंबोडिया, श्रीलंका, जॉर्डन, अर्जेंटीना, इक्वाडोर, ग्वाटेमाला और कुछ अन्य देशों पर 10 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। जिन देशों ने जबरन श्रम रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए हैं, उन पर 12.5 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है।


कौन से सामानों को मिली छूट?

अमेरिका ने कुछ उत्पादों को नए टैरिफ से बाहर रखा है। इनमें तेल और गैस, फर्टिलाइजर्स, कुछ खाद्य उत्पाद, स्टील, एल्युमिनियम, तांबा और ऑटोमोबाइल शामिल हैं। इसके अलावा, अमेरिका, मैक्सिको और कनाडा के बीच व्यापार समझौते (USMCA) के तहत शुल्क मुक्त सामान पर भी नए टैरिफ का असर नहीं होगा।


भारत पर प्रभाव

नए अमेरिकी टैरिफ का असर भारत के निर्यात क्षेत्र पर पड़ सकता है। भारत को 10 प्रतिशत की कम दर मिलने से संभावित नुकसान कुछ हद तक कम हो सकता है। भारतीय कपड़ा, इंजीनियरिंग सामान, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण जैसे क्षेत्रों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि अमेरिका भारत के लिए एक बड़ा निर्यात बाजार है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच व्यापार वार्ता आगे भी महत्वपूर्ण रहेगी। यदि दोनों देश आपसी सहमति से समाधान निकालते हैं, तो व्यापार पर दबाव कम किया जा सकता है।


अमेरिका की टैरिफ नीति का नया कदम

ट्रंप प्रशासन लगातार अपनी टैरिफ नीति को आगे बढ़ा रहा है। इससे पहले अमेरिका ने आपातकालीन शक्तियों के तहत कई बड़े टैरिफ लगाए थे, जिन्हें अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रद्द कर दिया था। इसके बाद प्रशासन ने ट्रेड एक्ट की धारा 301 के तहत नई व्यवस्था लागू की है। इसके अलावा, अमेरिका ने 16 देशों के खिलाफ अलग जांच भी शुरू की है, जिन पर आरोप है कि वे जरूरत से ज्यादा उत्पादन कर वैश्विक कीमतों को कम कर रहे हैं और अमेरिकी निर्माताओं को नुकसान पहुंचा रहे हैं। जांच के बाद इन देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा सकता है।