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अमेरिका द्वारा भारतीय वस्त्रों पर 25% टैरिफ का प्रभाव

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% टैरिफ लगाने की घोषणा की है, जिससे भारतीय वस्त्र उद्योग में चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि उन्हें लागत से कम दाम पर सामान बेचना होगा। एईपीसी के अध्यक्ष ने सरकार से हस्तक्षेप की मांग की है। इस टैरिफ का असर भारत और अमेरिका के बीच व्यापार पर भी पड़ेगा, जो पिछले 10 वर्षों में दोगुना हो चुका है। जानें इस विषय पर और क्या कहा गया है।
 

अमेरिकी टैरिफ का भारतीय वस्त्र उद्योग पर असर

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25 प्रतिशत टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह टैरिफ आज से लागू हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप अमेरिका में भारतीय सामानों पर 25 प्रतिशत कर लगाया जाएगा। इस निर्णय से कपड़ा व्यापारियों में चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि उन्हें अपनी फैक्ट्रियों को बनाए रखने और बड़े पैमाने पर श्रमिकों की छंटनी से बचने के लिए लागत से कम कीमत पर अपने उत्पाद बेचना होगा। उल्लेखनीय है कि अमेरिका ने भारत पर पाकिस्तान और बांग्लादेश सहित 50 से अधिक देशों के सामान पर टैरिफ लगाया है।


कपड़ा व्यापारियों की प्रतिक्रिया

विदेशी कपड़ा व्यापारियों की संस्था एईपीसी के अध्यक्ष सुधीर सेखरी ने कहा कि इस भारी नुकसान की भरपाई के लिए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की जा रही है। निर्यातक चिंतित हैं क्योंकि उन्हें अपनी फैक्ट्रियों को चालू रखने और श्रमिकों की छंटनी से बचने के लिए लागत से कम दाम पर सामान बेचना होगा। एईपीसी ने बताया कि अमेरिका भारतीय रेडिमेड गारमेंट्स का एक प्रमुख बाजार है, जिसमें 2024 में अमेरिका के कुल कपड़ा निर्यात में भारत की हिस्सेदारी 33 प्रतिशत थी।


चीन पर अमेरिका का टैरिफ

अमेरिका वर्तमान में रेडिमेड गारमेंट्स के लिए चीन से सबसे अधिक कपड़े का आयात करता है, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 21.9 प्रतिशत है। 2020 में यह 27.4 प्रतिशत थी। चीन, वियतनाम और बांग्लादेश मिलकर अमेरिका को 49 प्रतिशत कपड़े की आपूर्ति करेंगे। अमेरिका ने चीन पर 30 प्रतिशत और वियतनाम तथा बांग्लादेश पर 20 प्रतिशत टैरिफ निर्धारित किया है।


भारत और अमेरिका के बीच व्यापार में वृद्धि

मॉर्गन स्टेनली की एक रिपोर्ट के अनुसार, पिछले 10 वर्षों में भारत और अमेरिका के बीच व्यापार दोगुना से अधिक हो गया है। 2015 में यह व्यापार 20 अरब डॉलर था, जो 2025 में बढ़कर 40 अरब डॉलर होने की उम्मीद है। इस वृद्धि का मुख्य कारण इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा और कपड़ा क्षेत्र में हुई प्रगति है।