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अमेरिका ने ईरान पर सैन्य कार्रवाई की, जॉर्डन में हमले का लिया बदला

जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हमले के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। इस कार्रवाई के बाद क्षेत्र में तनाव और बढ़ गया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ा है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया है कि अमेरिका अपने सैनिकों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई की है, जिससे स्थिति और गंभीर हो गई है। जानें इस संघर्ष का क्षेत्रीय और वैश्विक प्रभाव क्या है।
 

अमेरिका की सैन्य कार्रवाई

तेहरान/वॉशिंगटन: जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर हुए हमले के जवाब में अमेरिका ने ईरान के खिलाफ एक बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को इसकी पुष्टि की, जिसमें बताया गया कि अमेरिकी सेना ने ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हवाई हमले किए। इस कार्रवाई के बाद पश्चिम एशिया में तनाव और बढ़ गया है।


अमेरिकी सेंट्रल कमान के अनुसार, यह अभियान लगभग दो घंटे तक चला। इस दौरान इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (आईआरजीसी) के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया। हमलों में सैन्य कमान केंद्र, मिसाइल और ड्रोन से जुड़े अड्डों के साथ-साथ कुछ वायु रक्षा प्रणालियों को भी लक्ष्य बनाया गया।


अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि जॉर्डन में अमेरिकी सैनिकों पर हुए हमले का जवाब देना आवश्यक था। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने सैनिकों और राष्ट्रीय हितों पर किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा।


ईरानी सरकारी मीडिया ने दावा किया कि होर्मुज जलडमरूमध्य के पास केशम द्वीप पर दो लोग घायल हुए हैं। इसके अलावा, देश के दक्षिण-पश्चिम और उत्तर-पश्चिम क्षेत्रों में कई विस्फोटों की भी सूचना मिली है।


इस संघर्ष का असर पूरे क्षेत्र में दिखाई देने लगा है। मिस्र के दमिएटा बंदरगाह पर खड़े दो गैस जहाजों पर ड्रोन हमले की सूचना है, जिससे दोनों जहाजों में आग लग गई। सऊदी अरब ने आरोप लगाया है कि ईरान समर्थित इराकी गुटों ने उसके तेल ठिकानों को निशाना बनाया। यमन के हूथी विद्रोहियों ने भी सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों पर हमले की जिम्मेदारी ली है।


बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी पड़ा है। होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 7.3 प्रतिशत बढ़कर 88.09 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई है।


इस बीच, ओमान, कतर और अन्य खाड़ी देशों की मध्यस्थता की कोशिशों के बावजूद दोनों देशों के बीच तनाव कम होता नहीं दिख रहा है। जॉर्डन हमले और अमेरिका की सैन्य कार्रवाई के चलते वार्ता की प्रक्रिया लगभग ठप पड़ गई है। फिलहाल किसी भी पक्ष ने औपचारिक बातचीत की घोषणा नहीं की है। ऐसे में निकट भविष्य में युद्धविराम या तनाव कम होने की संभावना बेहद कम नजर आ रही है। यह लगातार बढ़ता टकराव पूरे पश्चिम एशिया में बड़े युद्ध की आशंकाओं के साथ-साथ वैश्विक अर्थव्यवस्था और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर भी चिंताएं बढ़ा रहा है।