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अमेरिका ने जर्मनी से सैनिक हटाने का लिया निर्णय, ट्रंप की नाराजगी का असर

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से नाराज होकर जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों को हटाने का निर्णय लिया है। पेंटागन के अनुसार, यह प्रक्रिया अगले छह से 12 महीनों में पूरी होगी। मर्ज के ईरान के संदर्भ में किए गए विवादास्पद बयान ने ट्रंप को नाराज कर दिया। जानें इस निर्णय के पीछे की पूरी कहानी और यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की स्थिति के बारे में।
 

अमेरिका का जर्मनी से सैनिक हटाने का निर्णय

नई दिल्ली। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज से असंतोष के चलते जर्मनी में तैनात अपने सैनिकों को हटाने का निर्णय लिया है। प्रारंभ में, अमेरिका लगभग पांच हजार सैनिकों को वहां से वापस बुलाएगा। पेंटागन ने जानकारी दी है कि यह प्रक्रिया अगले छह से 12 महीनों में पूरी की जाएगी। ट्रंप और मर्ज के बीच हुई बयानबाजी के बाद यह कदम उठाया गया है।


मर्ज के बयान से ट्रंप की नाराजगी

मर्ज ने पिछले महीने एक कार्यक्रम में ईरान के संदर्भ में कहा था कि अमेरिका के पास कोई ठोस योजना नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका को यह नहीं पता कि वह इस संघर्ष से कैसे बाहर निकलेगा। मर्ज ने ईरान की बातचीत को टालने की क्षमता की सराहना की और कहा कि अमेरिका को बिना किसी परिणाम के इस्लामाबाद तक यात्रा करनी पड़ी, जिससे उसे अपमान का सामना करना पड़ा।


ट्रंप की प्रतिक्रिया

ट्रंप इस बयान से नाराज हो गए थे और मर्ज के कार्यों की आलोचना की। उन्होंने कहा कि मर्ज ईरान के परमाणु हथियारों को लेकर गलत धारणा रखते हैं। रिपोर्ट के अनुसार, पिछले साल दिसंबर तक जर्मनी में 36,000 से अधिक अमेरिकी सैनिक तैनात थे, जबकि जापान में सबसे ज्यादा 55,000 सैनिक मौजूद हैं।


यूरोप में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती

यूरोपीय देशों में अमेरिकी सैनिकों की तैनाती एक समझौते के तहत की गई है, जिसमें इटली में लगभग 12,000 और ब्रिटेन में 10,000 सैनिक तैनात हैं। जर्मनी में अमेरिकी सैन्य ठिकाने लंबे समय से यूरोप में अमेरिका की रणनीतिक उपस्थिति का महत्वपूर्ण हिस्सा रहे हैं। इस बीच, ट्रंप ने इटली और स्पेन से भी सैनिक हटाने के संकेत दिए हैं, यह कहते हुए कि ये देश ईरान के खिलाफ अमेरिका का समर्थन नहीं कर रहे हैं, जिससे नाटो के भीतर मतभेद बढ़ते जा रहे हैं।