☰
×

अमेरिका ने भारतीय आईटी कंपनियों के लिए लेबर सर्टिफिकेशन पर रोक लगाई

अमेरिकी प्रशासन ने भारतीय आईटी कंपनियों जैसे इंफोसिस और विप्रो के लिए लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम को निलंबित कर दिया है। इस निर्णय से ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने कहा कि नई अर्जियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और लंबित अर्जियों पर कोई कार्रवाई नहीं होगी। उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस प्रक्रिया की आवश्यकताओं पर भी प्रकाश डाला। जानें इस फैसले के पीछे के कारण और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
 

अमेरिकी प्रशासन का बड़ा निर्णय

वॉशिंगटन: अमेरिका में भारतीय आईटी कंपनियों के लिए एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया गया है। अमेरिकी सरकार ने कॉग्निजेंट, इंफोसिस, टाटा, विप्रो, एचसीएल और कैपजेमिनी जैसी प्रमुख आईटी कंपनियों के साथ-साथ माइक्रोसॉफ्ट और एडोब को भी परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रोग्राम से निलंबित करने की घोषणा की है। यह कार्यक्रम विदेशी कर्मचारियों के लिए ग्रीन कार्ड प्रक्रिया में आवश्यक श्रम प्रमाणन प्राप्त करने के लिए कंपनियों द्वारा आवेदन करने की अनुमति देता है।


इस फैसले की जानकारी अमेरिकी श्रम सचिव कीथ सोंडरलिंग ने दी। इस अवसर पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस भी उपस्थित थे। सोंडरलिंग ने स्पष्ट किया कि संबंधित कंपनियों की नई श्रम प्रमाणन अर्जियों को स्वीकार नहीं किया जाएगा और लंबित अर्जियों पर भी फिलहाल कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।


सोंडरलिंग के अनुसार, 2009 से इन कंपनियों ने लगभग 30 लाख विदेशी कर्मचारियों की मांग की है। इस अवधि में 2.30 लाख से अधिक एच-1बी वीजा मंजूर किए गए और एक लाख से ज्यादा स्थायी श्रम प्रमाणन जारी किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि इन नियुक्तियों के कारण अमेरिकी कर्मचारियों के रोजगार के अवसरों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।


उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने बताया कि परमानेंट लेबर सर्टिफिकेशन प्रक्रिया के तहत कंपनियों को विदेशी कर्मचारियों के लिए आवेदन करने से पहले अमेरिका में संबंधित नौकरी का विज्ञापन देना आवश्यक है। उन्हें यह साबित करना होता है कि उस पद के लिए योग्य अमेरिकी कर्मचारी उपलब्ध नहीं हैं और विदेशी कर्मचारी को स्थायी रूप से नियुक्त करने की आवश्यकता है।


वेंस ने कुछ विश्वविद्यालयों की भी आलोचना की, यह आरोप लगाते हुए कि कुछ संस्थान विदेशी छात्रों को अमेरिका आने की अनुमति देने वाले कार्यक्रमों का दुरुपयोग कर रहे हैं। जे-1 वीजा के तहत विदेशी नागरिकों को शैक्षणिक, प्रशिक्षण और सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रमों में भाग लेने की अनुमति दी जाती है।


इससे पहले, सितंबर में ट्रंप प्रशासन ने एच-1बी वीजा से संबंधित नियमों में बदलाव का प्रस्ताव भी रखा था। अमेरिकी प्रशासन के इस नए कदम से भारतीय आईटी कंपनियों और उनके विदेशी कर्मचारियों की ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पर प्रभाव पड़ने की संभावना है। हालांकि, इसके वास्तविक प्रभाव का आकलन संबंधित आदेश की शर्तों और उसके कार्यान्वयन के बाद ही किया जा सकेगा।