अमेरिका ने सीरिया में ISIS ठिकानों पर किया बड़ा हवाई हमला
सीरिया में अमेरिकी हवाई हमले की जानकारी
वॉशिंगटन: अमेरिका ने शनिवार रात को सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों पर बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। यह कार्रवाई तीन अमेरिकी नागरिकों की मौत का प्रतिशोध मानी जा रही है। अमेरिकी विदेश विभाग और सेंट्रल कमांड ने इस 'सर्जिकल स्ट्राइक' का वीडियो जारी किया है, जो पूरी स्थिति को दर्शाता है। यह कार्रवाई राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य पिछले महीने अमेरिकी सैनिकों पर हुए घातक हमले का बदला लेना था।
लड़ाकू विमानों द्वारा आतंकी ठिकानों का नाश
सेंट्रल कमांड द्वारा साझा किए गए वीडियो में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को विभिन्न स्थानों पर आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले करते हुए देखा जा सकता है। वीडियो में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि कैसे अमेरिकी वायुसेना ने कई ठिकानों को निशाना बनाकर उन्हें मलबे में बदल दिया।
13 दिसंबर के हमले का प्रतिशोध
अमेरिकी सेना ने स्पष्ट किया है कि ये हमले 13 दिसंबर 2025 को पलमायरा में हुए हमले का प्रतिशोध हैं, जिसमें एक ISIS आतंकवादी ने घात लगाकर हमला किया था। इस हमले में आयोवा नेशनल गार्ड के दो सैनिक, 25 वर्षीय एडगर ब्रायन टोरेस-टोवार और 29 वर्षीय विलियम नथानिएल हॉवर्ड शहीद हो गए थे। इसके अलावा, एक अमेरिकी नागरिक दुभाषिया की भी जान गई थी। यह हमला दिसंबर 2024 में बशर अल-असद के शासन के पतन के बाद से अमेरिकी बलों पर पहला प्राणघातक हमला था।
'दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढ निकालेंगे'
सेंट्रल कमांड ने वीडियो के साथ जारी अपने बयान में आतंकियों को कड़ी चेतावनी दी है। सेना ने कहा है कि यदि कोई उनके योद्धाओं को नुकसान पहुंचाएगा, तो वे उसे दुनिया के किसी भी कोने में ढूंढ निकालेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी न्याय से बचने की कोशिश करें, लेकिन वे सफल नहीं होंगे।
जॉर्डन की सेना भी ऑपरेशन में शामिल
यह ऑपरेशन 19 दिसंबर 2025 को शुरू हुआ था, जिसमें मध्य सीरिया में लगभग 70 ठिकानों को नष्ट किया गया। इस विशेष अभियान में अमेरिका के साथ जॉर्डन की सेना भी सक्रिय रूप से शामिल है। शनिवार के हवाई हमलों से एक दिन पहले, सीरियाई सुरक्षा बलों ने 'लेवेंट' क्षेत्र में ISIS के मुख्य सैन्य कमांडर को गिरफ्तार करने का दावा किया था।
आपको बता दें कि 2010 के दशक के मध्य में इराक और सीरिया के बड़े हिस्से पर ISIS के कब्जे के बाद से ही अमेरिकी सेना वहां मौजूद है। वर्तमान में भी सैकड़ों अमेरिकी सैनिक सीरिया में तैनात हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य इस्लामिक आतंकवाद को समाप्त करना और भविष्य के हमलों को रोकना है।