अमेरिकी अदालत ने एच-1 बी वीजा शुल्क को रद्द किया, ट्रंप प्रशासन को झटका
अमेरिकी न्यायालय का महत्वपूर्ण निर्णय
वॉशिंगटन: एक संघीय न्यायाधीश ने ट्रंप प्रशासन द्वारा एच-1 बी वीजा पर 1 लाख डॉलर (लगभग 83 लाख रुपये) की अतिरिक्त फीस लगाने के निर्णय को रद्द कर दिया। न्यायाधीश लियो टी. सोरोकिन ने अपने 42 पन्नों के फैसले में कहा कि इस मामले का मुख्य मुद्दा इमिग्रेशन नीति नहीं, बल्कि यह था कि क्या राष्ट्रपति प्रशासन ने बिना कांग्रेस की मंजूरी के नया टैक्स लगाया था।
उन्होंने कहा, "अदालत का मानना है कि यह नीति एच-1 बी याचिकाओं पर एक अनधिकृत टैक्स लगाती है, और इसके लिए कांग्रेस ने कोई अधिकार नहीं दिया है।" न्यायाधीश ने यह भी स्पष्ट किया कि एच-1 बी याचिकाओं पर 1 लाख डॉलर का टैक्स लगाने की अनुमति किसी कानून में नहीं है।
ट्रंप प्रशासन का तर्क था कि यह शुल्क विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर प्रतिबंध लगाने की राष्ट्रपति की शक्ति का हिस्सा है, लेकिन न्यायाधीश ने इसे खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दिया गया है, वे राष्ट्रपति को नया टैक्स लगाने का अधिकार नहीं देते।
न्यायाधीश ने लिखा, "इन कानूनों को इस तरह नहीं पढ़ा जा सकता कि वे कांग्रेस की विशेष टैक्स लगाने की शक्ति राष्ट्रपति को सौंपते हों।" उन्होंने यह भी कहा कि राष्ट्रपति की शक्तियां संविधान की सीमाओं या कांग्रेस द्वारा दिए गए अधिकारों का उल्लंघन नहीं कर सकतीं।
सरकार ने यह भी तर्क किया कि 1 लाख डॉलर की राशि टैक्स नहीं बल्कि इमिग्रेशन प्रतिबंध का हिस्सा है। इस पर न्यायाधीश ने स्पष्ट किया, "टैक्स को प्रतिबंध नहीं कहा जा सकता।" उन्होंने अमेरिकी संविधान का उल्लेख करते हुए कहा कि टैक्स लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस को दिया गया है।
न्यायाधीश ने पाया कि जिन इमिग्रेशन कानूनों का हवाला दिया गया, वे राष्ट्रपति को नियम, प्रतिबंध और शर्तें लगाने की अनुमति देते हैं, लेकिन नया टैक्स बनाने की अनुमति नहीं देते। उन्होंने कहा कि इस नीति को लागू करने वाली सरकारी एजेंसियां अपने कानूनी अधिकारों से आगे बढ़ गई थीं।
अंत में, अदालत ने इस नीति को अवैध घोषित करते हुए इसे पूरे देश में रद्द कर दिया। न्यायाधीश ने आदेश दिया, "इस घोषणा को लागू करने वाली नीति को अवैध घोषित किया जाता है और इसे पूरी तरह रद्द किया जाता है।"