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अमेरिकी कोर्ट ने ट्रंप के एच 1बी वीजा शुल्क को किया रद्द

अमेरिकी फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा एच 1बी वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस वसूलने की नीति को रद्द कर दिया है। इस फैसले से भारतीय नागरिकों को बड़ी राहत मिली है। ट्रंप ने यह शुल्क विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों पर लागू किया था, जिसे 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने चुनौती दी थी। कोर्ट ने इसे टैक्स मानते हुए संसद की मंजूरी की आवश्यकता बताई। इस निर्णय से भारतीय आईटी पेशेवरों को विशेष लाभ होगा।
 

अमेरिकी कोर्ट का महत्वपूर्ण फैसला


वॉशिंगटन में एक फेडरल कोर्ट ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा एच 1बी वीजा पर एक लाख डॉलर की फीस वसूलने की नीति को रद्द कर दिया है। बोस्टन कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह शुल्क वास्तव में एक टैक्स है, जिसे लागू करने के लिए राष्ट्रपति की बजाय संसद की स्वीकृति आवश्यक थी। इस निर्णय से भारतीय नागरिकों को महत्वपूर्ण राहत मिली है।


ट्रंप ने सितंबर 2025 में यह घोषणा की थी कि एच 1बी वीजा पर विदेशी कर्मचारियों को नौकरी देने वाली कंपनियों को हर वीजा के लिए एक लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस चुकानी होगी। इसके बाद, 20 राज्यों के अटॉर्नी जनरल ने इस नीति को चुनौती दी थी। अब ट्रंप प्रशासन इस फैसले के खिलाफ अपील कर सकता है। पहले, एच 1बी वीजा के लिए कंपनियों को दो से पांच हजार डॉलर तक की फीस चुकानी पड़ती थी।


यह वीजा भारतीय आईटी पेशेवरों द्वारा सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, इसलिए कोर्ट का यह निर्णय भारतीयों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है। ट्रंप प्रशासन ने अदालत में तर्क दिया था कि एच 1बी प्रणाली का दुरुपयोग हो रहा है, क्योंकि कई कंपनियां कम वेतन पर विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त कर रही थीं। सरकार ने इसे आर्थिक दंड के रूप में पेश किया, लेकिन कोर्ट ने इस तर्क को स्वीकार नहीं किया।