अमेरिकी विदेश मंत्री की भारत यात्रा: ईरान-अमेरिका युद्ध के अंत की उम्मीद
महायुद्ध के अंत की ओर बढ़ते कदम
नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे गंभीर संघर्ष का अंत अब निकट प्रतीत हो रहा है। भारत के दौरे पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मध्य पूर्व में युद्ध समाप्ति की संभावनाओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि ईरान इस शनिवार तक एक शांति समझौते को स्वीकार कर सकता है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए रूबियो ने कहा, "हमारे पास इस मुद्दे पर जल्द ही कुछ बड़ा कहने के लिए हो सकता है।"
युद्ध की शुरुआत और उसके परिणाम
यह संघर्ष 28 फरवरी को शुरू हुआ, जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर एक बड़ा हवाई हमला किया, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई। इसके बाद ईरान ने खाड़ी देशों पर जवाबी हमले शुरू किए, जिसमें यूएई, कतर, कुवैत और बहरीन के अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। ईरान ने खामेनेई के बाद उनके बेटे को नया नेता घोषित कर दिया और होर्मुज जलडमरूमध्य को बंद कर दिया, जिससे वैश्विक ऊर्जा संकट उत्पन्न हो गया।
पाकिस्तान की मध्यस्थता की भूमिका
इस संघर्ष में पाकिस्तान ने मध्यस्थता की भूमिका निभाई है। पाकिस्तानी सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने हाल ही में ईरान का दौरा किया, ताकि दोनों देशों के बीच बातचीत को बढ़ावा दिया जा सके। अमेरिकी विदेश मंत्री ने भी इस बात की पुष्टि की है कि ईरान के साथ बातचीत में अमेरिका ने कुछ सकारात्मक प्रगति की है।
अमेरिका की शर्तें
रूबियो ने ईरान के सामने अमेरिका की शर्तों को दोहराया। उन्होंने कहा कि ईरान को होर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए खोलना होगा और अपने पास मौजूद संवर्धित यूरेनियम को सौंपना होगा। उन्होंने ट्रंप की नीति का उल्लेख करते हुए कहा कि वैश्विक समस्याओं का समाधान बातचीत और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।