अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो का भारत दौरा: ऊर्जा सहयोग पर नई पहल
भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग की नई दिशा
नई दिल्ली: भारत और अमेरिका के बीच ऊर्जा सहयोग को लेकर नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं। वर्तमान में भारत यात्रा पर आए अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो आज जामनगर में मुकेश अंबानी से मुलाकात करने वाले हैं। उन्होंने मंगलवार को बताया कि अमेरिका रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ वेनेजुएला के कच्चे तेल को अधिक रिफाइन करने की संभावनाओं पर चर्चा कर रहा है।
रुबियो ने भारत को 'रिफाइनिंग सुपरपावर' के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत की तेल आयात में विविधता लाने की आवश्यकता को समझता है, और इस संदर्भ में वेनेजुएला को एक संभावित स्रोत माना जा रहा है। उनके अनुसार, रिलायंस पहले भी वेनेजुएला में कार्य कर चुकी है और वहां तेल से संबंधित रियायतें पहले से मौजूद हैं। कंपनी ने अतीत में वहां का कच्चा तेल रिफाइन भी किया है और उसके पास भारी कच्चे तेल को प्रोसेस करने की क्षमता है। रुबियो ने कहा कि जैसे-जैसे वेनेजुएला का तेल उत्पादन बढ़ेगा, भारतीय कंपनी अधिक तेल प्रोसेस करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस विषय पर चर्चाएं आगे भी जारी रहेंगी।
जामनगर में रुबियो का कार्यक्रम
रुबियो बुधवार को जामनगर में रिलायंस रिफाइनरी का दौरा करेंगे। कार्यक्रम में अंतिम समय में बदलाव के बाद वे वहां रात बिताने की संभावना भी है। जामनगर में वंतारा सेंटर पर वे मुकेश अंबानी के साथ डिनर करेंगे। मुंबई छोड़ने से पहले, वे गौतम अदाणी और टाटा समूह के प्रमुख एन. चंद्रशेखरन से भी मुलाकात करेंगे।
रूसी तेल पर रुबियो की टिप्पणी
भारत द्वारा रूसी तेल खरीदने के संदर्भ में रुबियो ने कहा कि नई दिल्ली ने बार-बार अपने ऊर्जा पोर्टफोलियो में विविधता लाने की इच्छा व्यक्त की है, जो एक समझदारी भरी रणनीति है। उनके अनुसार, आपूर्ति के स्रोत एक रात में नहीं बदले जा सकते, लेकिन भारत ने इस दिशा में काफी प्रगति की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका भारत के लिए ऊर्जा आपूर्ति का एक महत्वपूर्ण स्रोत बनना चाहता है। इसका मतलब है कि वाशिंगटन अब केवल व्यापार समझौते पर ध्यान नहीं दे रहा, बल्कि भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने पर भी ध्यान केंद्रित कर रहा है।
इस दौरे में उद्योग जगत के प्रमुख नामों से मुलाकात को दोनों देशों के बीच ऊर्जा और निवेश सहयोग के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि इन चर्चाओं से कोई ठोस समझौता निकलता है या नहीं।