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अमेरिकी संविधान की मजबूती और ट्रंप का संकट

इस लेख में अमेरिका के संविधान की मजबूती और डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ के फैसले पर सुप्रीम कोर्ट की प्रतिक्रिया का विश्लेषण किया गया है। यह बताया गया है कि कैसे संविधान ने लोकतंत्र की रक्षा की और नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की। अमेरिका की राजनीतिक प्रणाली में चेक-बैलेंस की महत्वपूर्ण भूमिका को समझने के लिए यह लेख एक महत्वपूर्ण दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है।
 

संविधान और लोकतंत्र की रक्षा

संविधान और सुप्रीम कोर्ट की भूमिका को समझने के लिए अमेरिका का उदाहरण महत्वपूर्ण है। अमेरिका के दो सौ साल और भारत की स्वतंत्रता के आठ दशकों में क्या अंतर है? भारत ने अपने संविधान के माध्यम से सरकार को 'हम भारत के लोग' का माईबाप बना दिया है, जबकि संस्थाएं कमजोर हो गई हैं। इसके परिणामस्वरूप, 140 करोड़ लोग भय, भूख और भक्ति की जिंदगी जी रहे हैं।


अमेरिकी संविधान, जो ढाई सौ साल पुराना है, में डोनाल्ड ट्रंप एकमात्र राष्ट्रपति हैं जिन्होंने संविधान और संस्थाओं को नजरअंदाज किया। उन्होंने आपातकालीन प्रावधानों का उपयोग करते हुए मनमाने टैरिफ लागू किए, जिससे वैश्विक स्तर पर हलचल मच गई। लेकिन अमेरिकी नागरिकों ने इस मनमानी को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, और कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध करार दिया।


ट्रंप का गुस्सा स्वाभाविक था। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट और उसके जजों पर कई तरह के आरोप लगाए। अमेरिकी संविधान के अनुसार, नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार है। राष्ट्रपति चाहे जितना भी दबाव डालें, सुप्रीम कोर्ट के जज संविधान के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को बनाए रखते हैं।


अमेरिकी न्यायपालिका की स्वतंत्रता विधायिका और कार्यपालिका से अलग है। जब सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप के टैरिफ को अवैध ठहराया, तो ट्रंप ने नए टैरिफ का आदेश दिया, जो केवल पांच महीने तक मान्य रहेगा। यह स्पष्ट है कि ट्रंप ने सुप्रीम कोर्ट की अनदेखी की।


इससे अमेरिका की छवि को नुकसान नहीं हुआ, बल्कि वैश्विक मीडिया ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले को लोकतंत्र की जीत बताया। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों और कनाडा सरकार ने भी इस फैसले की सराहना की।


इससे यह सवाल उठता है कि अमेरिका की यह विशेषता क्यों है? इसका उत्तर अमेरिकी संविधान में निहित है। अमेरिका उन स्वतंत्र विचारों वाले लोगों का देश है जो स्वतंत्रता और अवसर की तलाश में आए थे।


अमेरिका में नागरिकों को अपने अधिकारों की रक्षा का अधिकार है। यहां कोई भी व्यक्ति अपने जीवन में न्यूनतम सरकारी हस्तक्षेप के साथ जी सकता है। यही कारण है कि अमेरिका में स्वतंत्रता और अवसर की संभावनाएं अधिक हैं।


संविधान के निर्माण के समय, यह सुनिश्चित किया गया था कि नागरिकों का जीवन स्वतंत्र और सुरक्षित हो। इसलिए अमेरिका में विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच एक मजबूत चेक-बैलेंस प्रणाली है।


अमेरिका की संघीय व्यवस्था में, प्रत्येक राज्य और उसके गवर्नर की शक्तियां स्पष्ट हैं। राष्ट्रपति ट्रंप का केंद्रीय सरकार पर प्रभाव है, लेकिन अमेरिकी नागरिकों को इससे डरने की आवश्यकता नहीं है। संविधान की चेक-बैलेंस प्रणाली उनके अधिकारों की रक्षा करती है।