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अमेरिकी सीनेटर की भारत पर रूस से तेल खरीदने की आलोचना

अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने भारत की रूस से सस्ते तेल खरीदने की नीति पर कड़ी आलोचना की है। उन्होंने कहा कि भारत पुतिन का समर्थन करने की कीमत चुका रहा है। यह बयान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने के निर्णय के बाद आया है। ग्राहम का यह बयान भारत के लिए एक कड़ा संदेश है, जो दर्शाता है कि अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक वर्ग भारत-रूस संबंधों को संदेह की दृष्टि से देखता है।
 

भारत की विदेश नीति पर उठे सवाल

अमेरिका में भारत की विदेश नीति को लेकर फिर से सवाल उठाए गए हैं, इस बार एक प्रमुख अमेरिकी सीनेटर ने आलोचना की है। रिपब्लिकन पार्टी के प्रभावशाली सदस्य लिंडसे ग्राहम ने भारत द्वारा रूस से सस्ते तेल की खरीद पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि भारत "पुतिन का समर्थन करने की कीमत चुका रहा है।" यह बयान पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत से आने वाले सामानों पर भारी टैरिफ लगाने के निर्णय के बाद आया है, जिसने दोनों देशों के बीच व्यापारिक तनाव को बढ़ा दिया है।


सीनेटर ग्राहम ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत पर लगाए गए भारी टैरिफ का संबंध रूस के साथ व्यापारिक संबंधों, विशेषकर तेल खरीद से है। उनका आरोप है कि भारत रूस से सस्ता तेल खरीदकर अप्रत्यक्ष रूप से पुतिन की "युद्ध मशीन" को वित्तीय सहायता दे रहा है, जिसका उपयोग यूक्रेन के खिलाफ युद्ध में किया जा रहा है।


उन्होंने कहा, "जो देश पुतिन के युद्ध का समर्थन कर रहे हैं, उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी। भारत अब इसका अनुभव कर रहा है।" उन्होंने चीन और ब्राजील को भी चेतावनी दी कि उन्हें भी जल्द ही इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं।


इस संदर्भ में, डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में भारत से आने वाले कई सामानों पर 50% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि यह निर्णय भारत को रूस से तेल खरीदने से रोकने के लिए लिया गया है। अमेरिका और पश्चिमी देशों का लगातार भारत पर रूस से दूरी बनाने का दबाव है। हालांकि, भारत ने अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं और रणनीतिक स्वायत्तता का हवाला देते हुए एक स्वतंत्र विदेश नीति अपनाई है।


भारत का कहना है कि वह तेल खरीदेगा जहां उसे सबसे अच्छी डील मिलेगी। सीनेटर ग्राहम का यह बयान भारत के लिए एक कड़ा संदेश है, जो दर्शाता है कि अमेरिका में एक बड़ा राजनीतिक वर्ग भारत-रूस संबंधों को संदेह की दृष्टि से देखता है। यदि ट्रंप सत्ता में लौटते हैं, तो भारत को इस मोर्चे पर और भी बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।