अमेरिकी सेना की ईरान पर मिसाइल हमले से बढ़ा तनाव
दुबई और वॉशिंगटन में बढ़ते सैन्य तनाव
दुबई, वॉशिंगटन। अमेरिकी सेना ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच दक्षिणी ईरान में स्थित मिसाइल लॉन्च साइटों और सैन्य ठिकानों पर लगातार मिसाइलें दागी हैं। अमेरिकी केंद्रीय कमान (CENTCOM) की इस बड़ी सैन्य कार्रवाई के बाद खाड़ी क्षेत्र में युद्ध जैसे हालात पैदा हो गए हैं। यह हमला उस वक्त हुआ है जब दोनों देशों के बीच कतर में पर्दे के पीछे शांति वार्ता चल रही थी।
आत्मरक्षा में अमेरिका की बड़ी कार्रवाई
अमेरिकी रक्षा मंत्रालय के अनुसार, यह कार्रवाई पूरी तरह से आत्मरक्षा में की गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ईरान के जवान अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लेन में चुपके से समुद्र के नीचे बारूदी सुरंगें बिछा रहे थे। इसके अलावा, ईरानी ठिकानों से अमेरिकी टोही विमानों और वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाने की तैयारी भी की जा रही थी। इस खतरे को देखते हुए अमेरिकी नौसेना और वायुसेना ने संयुक्त ऑपरेशन चलाकर ईरान के तटीय शहर बंदर अब्बास के पास कई मिसाइल बैटरियों को नष्ट कर दिया और दो सैन्य नौकाओं को समुद्र में डुबो दिया।
वार्ता के बीच भड़का सैन्य टकराव
खबरों के अनुसार, यह गोलाबारी बेहद संवेदनशील समय पर हुई है। पिछले महीने से दोनों देशों के बीच एक अस्थाई युद्धविराम चल रहा था। इसके अलावा, कतर की मध्यस्थता में 14-सूत्रीय स्थाई शांति समझौते पर कूटनीतिक बातचीत भी जारी है। अमेरिकी सेंट्रल कमान के प्रवक्ता ने स्पष्ट किया है कि वे क्षेत्र में शांति चाहते हैं, लेकिन अमेरिकी सैनिकों और वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। वहीं, ईरान ने इस अमेरिकी हमले को समुद्री डकैती और अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन बताते हुए कड़ी जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है।
दुनिया भर में बढ़ सकती है तेल की कीमतें
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण समुद्री तेल मार्ग माना जाता है, क्योंकि इसी संकरे रास्ते से वैश्विक बाजार में बिकने वाले कुल कच्चे तेल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा गुजरता है। भारत, चीन और जापान जैसे बड़े एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पूरी तरह इसी रूट पर निर्भर है। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि यदि यह टकराव लंबा खिंचा गया या ईरान ने होर्मुज जलमार्ग को पूरी तरह से रोकने की कोशिश की, तो दुनिया भर में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा।