अयातुल्ला अली खामेनेई: अमेरिका और इजरायल की नजरों में
पश्चिमी एशिया में युद्ध की जड़ें
पश्चिमी एशिया में युद्ध की स्थिति
पश्चिमी एशिया में हालात तेजी से बदल रहे हैं। पिछले एक महीने से ईरान और अमेरिका के बीच जुबानी जंग अब वास्तविक संघर्ष में बदल चुकी है। अमेरिका और इजरायल मिलकर ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले कर रहे हैं, जिससे ईरान में भय और अशांति का माहौल बन गया है। ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए इजरायल और अन्य देशों पर मिसाइल हमले किए हैं। इस संघर्ष के पीछे अयातुल्ला अली खामेनेई को मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया जा रहा है।
खामेनेई का सफर: धर्मगुरु से सुप्रीम लीडर
86 वर्षीय अयातुल्ला अली खामेनेई, जो 1989 से ईरान के सुप्रीम लीडर हैं, ने इस पद को ईरान के इस्लामी गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के निधन के बाद संभाला। खुमैनी ने 1979 की इस्लामी क्रांति का नेतृत्व किया, जिसने अमेरिका समर्थित शाह को सत्ता से बेदखल कर दिया। वर्तमान में, खामेनेई देश के आध्यात्मिक नेता के साथ-साथ सरकार, सेना और न्यायपालिका की अंतिम शक्ति भी रखते हैं।
ईरान की जनता में असंतोष
ईरान में हाल की स्थिति का आरंभ दो महीने पहले हुए प्रदर्शनों से हुआ। महंगाई के कारण लोग जीवन यापन में कठिनाइयों का सामना कर रहे थे, जिससे जनता ने खामेनेई के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। जब ये प्रदर्शन पूरे देश में फैल गए, तो अमेरिका ने इसमें हस्तक्षेप करते हुए प्रदर्शनकारियों का समर्थन किया और खामेनेई के खिलाफ कठोर कदम उठाने की घोषणा की।
अमेरिका का इरादा
अमेरिका का ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने का एक बड़ा कारण यह है कि वह फिर से अपनी पसंद के नेता को ईरान की सत्ता सौंपना चाहता है। 1979 की इस्लामी क्रांति से पहले ईरान पर अमेरिका समर्थित शाह का शासन था। अमेरिका अब ईरान में 1979 से पहले की राजनीतिक स्थिति को पुनर्स्थापित करना चाहता है।